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दुनिया की पहली Net-zero transatlantic flight 2023 में भरेगी उड़ान

स्थायी विमानन ईंधन का होगा इस्तेमाल, 70 फीसदी घटाएगा कार्बन उत्सर्जन
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जयपुर

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Aryan Sharma

Dec 17, 2022

दुनिया की पहली Net-zero transatlantic flight 2023 में भरेगी उड़ान

दुनिया की पहली Net-zero transatlantic flight 2023 में भरेगी उड़ान

लंदन. जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनियाभर में कई प्रयास हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर दुनिया की पहली नेट-जीरो ट्रांसअटलांटिक फ्लाइट वर्ष 2023 में लंदन से उड़ान भरेगी। फ्लाइट का संचालन ब्रिटिश एयरलाइन वर्जिन अटलांटिक की ओर से किया जाएगा। रोल्स-रॉयस ट्रेंट 1,000 इंजन वाला 'बोइंग 787 जेट' लंदन के हीथ्रो से न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरेगा। विमान में केरोसिन के बजाय स्थायी विमानन ईंधन (एसएएफ) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो 70 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा।

अपशिष्ट तेलों और वसा से तैयार ईंधन
ऐतिहासिक उड़ान के लिए वर्जिन अटलांटिक ने ब्रिटिश सरकार की प्रतियोगिता जीतकर एक मिलियन पाउंड (लगभग 10.08 करोड़) की धनराशि प्राप्त की है। एसएएफ का निर्माण मुख्य रूप से अपशिष्ट तेलों और वसा से किया जाएगा। हजारों किमी लंबी इस उड़ान के लिए इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ता वर्जिन अटलांटिक के साथ मिलकर काम करेंगे।

बढ़ेंगी हजारों नौकरियां
स्थायी विमानन ईंधन, डिकार्बोनाइजिंग (वातावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की प्रक्रिया) एविएशन के लिए महत्त्वपूर्ण है। एसएएफ न केवल विमानों को कार्बन मुक्त करने में महत्त्वपूर्ण होगा, बल्कि ईंधन सुरक्षा में सुधार करने के साथ-साथ ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में हजारों ग्रीन जॉब्स प्रदान करेगा।

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में हिस्सेदारी
वार्षिक कार्बन उत्सर्जन में विमानन उद्योग की हिस्सेदारी 2.5 फीसदी है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन में उद्योग का समग्र योगदान अधिक है क्योंकि इसका वातावरण में गैर-कार्बन प्रदूषकों पर प्रभाव पड़ता है, जो तापमान में वृद्धि करते हैं। एक शोध के अनुसार यदि विमानन क्षेत्र, एक देश होता तो यह चीन, अमरीका, भारत, रूस और जापान के बाद दुनिया का छठा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक होता। नेट जीरो की ओर बढ़ना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रतिवर्ष विमानों से होने वाला वायु प्रदूषण 16,000 आकस्मिक मृत्यु का कारण बनता है।