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सरहद पर पकड़ी गई पांच ‘सोनल चिरैया’ काट रही “उम्रकैद” की सजा

तीन साल में सरहद से पकड़ी गई थी आठ सोन चिरैया, सलाखों में तीन पक्षी तोड़ चुके दम फिर भी अफसर नहीं बरत रहे गंभीरता

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जयपुर. "पंछी नदियां पवन के झोंके...कोई सरहद ना इन्हें रोके"...। बॉलीवुड फिल्म रिफ्यूजी के गाने के बोल शायद आपने सुने होंगे। लेकिन हकीकत शायद इसके उलट और कड़वी है। परिंदों के लिए सरहद होती है और पार करने की सजा भी मिलती है। आसमान में भी सीमा पार करने पर उनको पकड़ा जाता है और जासूसों की तरह सलाखों के पीछे कर दिया जाता है। ऐसी ही कैद भोग रहे हैं पाकिस्तान से आए पांच पक्षी जो पिछले तीन साल से जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान के समीप बने वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में हैं।

तीन पक्षी तो उड़ान भरने का इंतजार करते-करते ही सलाखों में ही दम तोड़ चुके हैं। हैरत की बात है कि जासूसी के शक में सुरक्षा एजेंसियां अभी तक उनसे कुछ भी नहीं उगलवा सकी है फिर भी उन्हें कैदी की तरह ही रखा जा रहा है। तिल-तिल कर मर रहे ये पांचों पक्षी दुर्लभ प्रजाति के बताए जा रहा हैं।

दरअसल, बस्टर्ड समूह के दुर्लभ पक्षी तिलोर( होवारा बस्टर्ड) मध्य एशिया से पाकिस्तान की सीमा पार कर पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में विचरण करने आती है। इस दौरान सीमा पर तारबंदी में उलझकर चोटिल हो जाते हैं। उन पक्षियों को सीमा सुरक्षा बल के जवान जासूसी के शक में पकडते हैं जांच पूरी कर फिर इलाज के लिए वन विभाग को सौंप देते हैं। इसी तरह इस रेस्क्यू सेंटर में सीमावर्ती इलाकों से जून 2020 से अप्रेल 2023 तक अलग-अलग समय में कुल आठ दुर्लभ पक्षी पकड़े गए हैं। एक सोन भी चिरैया घायल अवस्था में लाई गई।

पकड़े गए पक्षियों के पंख व पांव में चोट थी, जो कुछ समय बाद ठीक हो गई थीं। बाद में इन पक्षियों को खुले आसमां में छोड़ा जाना था लेकिन वन विभाग के अफसरों की मनमर्जी के कारण ये सलाखों के पीछे चले गए। गत महीनों विभिन्न कारणों से आठ में से तीन पक्षियों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। सामने आया कि, डीसीएफ वाइल्ड ने कई बार अरण्य भवन में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को इन पक्षियों को आजादी दिलाने के लिए पत्र भी लिखा लेकिन उसके बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ।

सख्ती ऐसी कि. . .सीसीटीवी कैमरे से निगरानी

इन पांच दुर्लभ पक्षियों में से तीन को अलग एक बड़े एनक्लोजर में रखा जा रहा है जबकि दो पक्षी को अलग- अलग एन्कलोजर में रखा जाता है। इन पक्षियों की सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटरिंग होती है। सख्ती इतनी कि, उनके पास भी जाने की किसी को इजाजत नहीं है।

रोजाना हेल्थ चैकअप जरूरी

पड़ताल में सामने आया कि इन पक्षियों का रोजाना रूटीन हेल्थ चेकअप किया जाता है। उनकी डाइट का खास खयाल रखा जाता है। डाइट में सोयाबीन, मीट के अलावा सीजनल फल भी शामिल है।

अफसर बोले, छोड़ने के लिए स्वीकृति मांगी थी लेकिन नहीं मिली

इन पक्षियों को ठीक होने के वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए डीएफओ ने अरण्य भवन में पत्र भेजकर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर से स्वीकृति मांगी थी लेकिन उन्होंने नहीं दी। इसलिए यहां रखना पडा।

- हनुमाना राम, मुख्य वन्यजीव संरक्षक (वन्यजीव) ,जोधपुर संभाग

डिस्प्ले एरिया में रखने की तैयारी !

वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि केंद्रीय चिडियाघर प्राधिकरण के नियम के तहत इलाज के लिए रेस्क्यू किए गए पक्षी को स्वस्थ होने के बाद वापस आजाद कर देना चाहिए लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भी सामने आया कि इन पक्षियों को दुर्लभ प्रजाति के होने की वजह से माचिया जैविक उद्यान के डिस्प्ले एरिया में भी रखने की तैयारी की बात सामने आ रही है। लेकिन इसके लिए अफसरों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।