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इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधा के नाम पर बिजली बिल में बढ़ेगा फिक्स चार्ज!

इंफ्रास्ट्रचर सुविधा के नाम पर बिजली कंपनियां बिल में फिक्स चार्ज बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें अघरेलू उपभोक्ताओं (कॉमर्शियल, संस्थानिक, औद्योगिक) के लिए एनर्जी चार्ज कम करके फिक्स चार्ज बढ़ाने का फार्मूला सुझाया गया है।

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Electricity bill

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
जयपुर। इंफ्रास्ट्रचर सुविधा के नाम पर बिजली कंपनियां बिल में फिक्स चार्ज बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें अघरेलू उपभोक्ताओं (कॉमर्शियल, संस्थानिक, औद्योगिक) के लिए एनर्जी चार्ज कम करके फिक्स चार्ज बढ़ाने का फार्मूला सुझाया गया है। जबकि, सालाना 12 हजार यूनिट बिजली खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं से यूनिट की बजाय लोड के आधार पर फिक्स चार्ज लेने का खाका तैयार है। डिस्कॉम्स की ओर से राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग में दायर टैरिफ पीटिशन में इसकी अनुमति चाही है। इस श्रेणी से करीब 16 लाख उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। हालांकि, बिजली कंपनियों का तर्क है कि व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है, इससे केवल कुछ ही बड़े उपभोक्ताओं पर ही वित्तीय भार आएगा। सूत्रों के मुताबिक अभी सभी घरेलू उपभोक्ताओं को इसके दायरे में लाने पर हल्ला मचने की आशंका रहेगी, इसलिए इन्हें धीरे—धीरे इस फार्मूले में फिट करेंगे।

1. 5 प्रतिशत देकर, 5 प्रतिशत लेने का फॉर्मूला...
उपभोक्ता- कॉमर्शियल, मिक्स लोड, औद्योगिक श्रेणी

फॉर्मूला- 5 प्रतिशत एनर्जी चार्ज कम करके 5 प्रतिशत ही फिक्स चार्ज बढ़ाना।
दावा- से उपभोक्ताओं तक बिजली सप्लाई के लिए बड़ा इन्फ्रास्र्टक्चर काम में आ रहा है, लेकिन उसके अनुपात में फिक्स चार्ज कम है। इसलिए इसमें 5 प्रतिशत बढ़ोत्तरी चाही है। इसका भार एनर्जी चार्ज में पांच प्रतिशत कटौती कर कम किया जाएगा।

स्थिति- उपभोक्ता जितनी बिजली खपत करेगा उस आधार पर एनर्जी चार्ज लिया जाता है। इस खपत में कमी—बढ़ोत्तरी होती रहती है। लेकिन बिजली कंपनियों के पास फिक्स चार्ज समान रूप से ही जाएगा। इसमें कमी या बढ़ोत्तरी नहीं होती। फिक्स चार्ज के पेटे ज्यादा राशि एकत्रित की जा सकेगी।
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2. बड़े उपभोक्ताओं पर नजर...
उपभोक्ता— सालाना 12 हजार या इससे ज्यादा यूनिट बिजली उपभोग करने वाले घरेलू उपभोक्ता।

फॉर्मूला- यूनिट की बजाय लोड के आधार पर फिक्स चार्ज लिए जाएं। अभी यूनिट के तहत अधिकतम 400 रुपए फिक्स चार्ज हैं, इसे अब विद्युत लोड के आधार पर 80 रुपए प्रति किलोवॉट करना।
दावा- अभी 5 किलोवॉट लोड क्षमता वाले उपभोक्ता हों या 50 किलोवॉट वाले, दोनों को समान रूप से अधिकतम 400 रुपए फिक्स चार्ज देने पड़ रहे हैं। जबकि, 50 किलोवॉट वाले कनेक्शन के लिए अलग से इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया करना पड़ रहा है जिस पर ज्यादा खर्चा होता है। इसका भार (फिक्स चार्ज के रूप में) भी कम लोड क्षमता वाले उपभोक्ता पर पड़ रहा है। देश के ज्यादातर राज्यों ने यही अपनाया हुआ है। केन्द्र सरकार भी बार-बार इसी मैकेनिज्म को अपनाने के लिए जोर दे रही है।

स्थिति- कम लोड क्षमता वालो उपभोक्ता को किसी तरह की अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी लेकिन 5 किलोवॉट से ज्यादा लोड कनेक्शनधारी के लिए फिक्स चार्ज बढ़ जाएंगे। मसलन, 10 किलोवॉट क्षमता वाला उपभोक्ता अभी 400 रुपए फिक्स चार्ज दे रहा है, लेकिन इसे व्यवस्था के बाद 800 रुपए (80 रुपए प्रति किलोवॉट के आधार पर) देने होंगे।