
Joginder Singh Awana: राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने राजस्थान में अपनी संगठनात्मक ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बसपा से कांग्रेस में आए पूर्व विधायक जोगिंदर सिंह अवाना को पार्टी का राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह घोषणा 14 मई 2025 को की गई, जिसके बाद राजस्थान की राजनीति में आरएलडी की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बता दें, जोगिन्दर अवाना हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आरएलडी में शामिल हुए थे, अब पार्टी को राज्य में मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जोगिंदर सिंह अवाना का राजनीतिक करियर विविधताओं और उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में नदबई सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीत हासिल की थी। इस जीत ने उन्हें एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित किया।
हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर नदबई से मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हाल ही में, 12 अप्रैल 2025 को, उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आरएलडी का दामन थामा, जिसे राजस्थान की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया।
बताते चलें कि राष्ट्रीय लोक दल की स्थापना 1996 में चौधरी अजीत सिंह ने की थी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के हितों को केंद्र में रखकर पार्टी को एक मजबूत आधार दिया। आरएलडी शुरू में उत्तर प्रदेश तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे इसने अन्य राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राजस्थान में जाट समुदाय की आबादी सबसे ज्यादा है, इसलिए आरएलडी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश की है। पार्टी ने किसानों के मुद्दों, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय को अपने एजेंडे का हिस्सा बनाया है। हाल के वर्षों में, जयंत चौधरी के नेतृत्व में आरएलडी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और विस्तार देने का प्रयास किया है।
जोगिंदर अवाना की नियुक्ति को राजस्थान में आरएलडी के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। अवाना का जाट समुदाय के बीच गहरा प्रभाव और नदबई जैसे क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके अलावा, जयंत चौधरी ने अवाना की शपथ के दौरान कहा था कि उनकी नियुक्ति से पार्टी को राजस्थान में नया जोश मिलेगा और यह ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हितों को मजबूती देगी।
हालांकि, अवाना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस का दबदबा रहा है और आरएलडी को एक तीसरे विकल्प के रूप में अपनी जगह बनानी होगी। इसके लिए पार्टी को न केवल जाट समुदाय, बल्कि अन्य जातियों और समुदायों का समर्थन भी जुटाना होगा। साथ ही, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और युवा नेताओं को जोड़ने की जरूरत होगी।
Published on:
14 May 2025 07:13 pm

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