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‘किसी को थानेदारी का अधिकार नहीं’, मंत्री जोगाराम ने गहलोत-पायलट से जताई सहमति; कश्मीर पर दिया ये बयान

Opretion Sindoor: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देशभर में जहां सेना की कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं सीजफायर और अमेरिका की कथित मध्यस्थता को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

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Minister Jogaram Patel

Opretion Sindoor: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देशभर में जहां सेना की कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं सीजफायर और अमेरिका की कथित मध्यस्थता को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं अशोक गहलोत और सचिन पायलट की टिप्पणी का जवाब देते हुए राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कड़ा बयान दिया है।

मंत्री पटेल ने कहा कि चाहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हों या कोई और, भारत की आंतरिक सुरक्षा में थानेदारी का अधिकार किसी को नहीं है। भारत सरकार और हमारी सेना आतंकवाद से निपटने में पूरी तरह सक्षम है, और यह बात पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर में देख ली है।

'संसद में चर्चा का सवाल नहीं उठता'

गहलोत और पायलट द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाकर सीजफायर और अमेरिका की मध्यस्थता पर चर्चा की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री जोगाराम ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा कोई सार्वजनिक विषय नहीं है, जिस पर संसद या विधानसभा में खुलकर चर्चा हो। ऐसा करना न केवल संवेदनशील सूचनाओं को उजागर करना होगा, बल्कि सेना के मनोबल पर भी प्रभाव डालेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मिली बड़ी सफलता

मंत्री पटेल ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने जिस मुस्तैदी से जवाबी कार्रवाई की, वह अभूतपूर्व रही। भारतीय सेना ने 21 आतंकी ठिकानों में से 9 को पूरी तरह खत्म किया और करीब 100 आतंकियों को ढेर किया, जिनमें कई वांछित आतंकी शामिल थे।

यहां देखें वीडियो-


जोगाराम पटेल ने अमेरिका की मध्यस्थता को लेकर स्पष्ट किया कि कश्मीर, POK या आतंकी मामलों पर किसी भी देश को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। भारत की नीति स्पष्ट है कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसे भारत स्वयं सुलझाएगा।

सर्वदलीय बैठक की संभावना जताई

हालांकि, मंत्री ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हो तो सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है, लेकिन उसमें भी देश की सुरक्षा संबंधी मामलों पर केवल सीमित और गोपनीय चर्चा ही संभव है। उन्होंने कहा कि यह वक्त एकजुट होकर सेना के पराक्रम का सम्मान करने का है, न कि राजनीतिक बयानों से भ्रम फैलाने का।

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