राजस्थान का सियासी संग्राम कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव तक टलता दिख रहा है। इस बीच गहलोत गुट आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मध्यस्थ तलाश रहा है। यही वजह है कि बुधवार को दिल्ली में मौजूद कारण बताओ नोटिस झेलने वाले तीनों नेताओं ने गांधी परिवार के नजदीकी माने जाने वाले कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक व जितेन्द्र सिंह के साथ करीब आधे घंटे मुलाकात की।
राजस्थान का सियासी संग्राम कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव तक टलता दिख रहा है। इस बीच गहलोत गुट आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मध्यस्थ तलाश रहा है। यही वजह है कि बुधवार को दिल्ली में मौजूद कारण बताओ नोटिस झेलने वाले तीनों नेताओं ने गांधी परिवार के नजदीकी माने जाने वाले कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक व जितेन्द्र सिंह के साथ करीब आधे घंटे मुलाकात की।
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता बनी हुई है। इसके साथ ही सियासी संकट का सम्मानजनक हल भी तलाशा जा रहा है। पार्टी आलाकमान ने फिलहाल कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन गहलोत गुट के नेताओं के तेवर नरम पड़ रहे हैं। राजस्थान में जो कुछ हुआ है। ऐसे में अब आलाकमान के लिए भी बीच का रास्ता तलाशना मुश्किल पड़ रहा है क्योंकि गहलोत की गोटी ने आलाकमान के वर्चस्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरटीडीसी की पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन की रवानगी के मौके पर सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल, जलदाय मंत्री महेश जोशी व आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेन्द्र राठौड़ पहुंचे थे। वासनिक व जितेन्द्र सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने रेलवे स्टेशन के वीआइपी लाउंज में करीब आधे घंटे वासनिक व जितेन्द्र सिंह से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। साथ ही आग्रह कि वे गहलोत गुट की बात को आलाकमान तक पहुंचाएं।
पार्टी अध्यक्ष चुनाव तक टलता दिख रहा मामला
नोटिस पाने वाले तीनों नेताओं का जवाब मिलने के बाद अनुशासन कार्रवाई समिति जल्द ही बैठक बुलाकर तीनों के जवाब का अध्ययन करेगी। फिर अपनी राय से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराएगी। हालांकि, तीनों ने ही अपने जवाब में उन आरोपों से इनकार किया है जो कारण बताओ नोटिस में लगाए गए हैं।
पर्यटन मंत्री नहीं रहे मौजूद
आरटीडीसी सीधे तौर पर पर्यटन मंत्री के अधीन आता है। इसके बावजूद पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की इस कार्यक्रम में गैरमौजूदगी और राजस्थान में विधायकों की बगावत के मामले में नोटिस झेल रहे तीनों नेताओं के पहुंचने से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया था।