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सरकारी गर्ल्स स्कूल व कॉलेज की बालिकाएं देगी पीरियड सब्जेक्ट पर सजेशन, लगेंगे 5 हजार बॉक्स

वसुधा जन विकास संस्थान और राजस्थान ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को 'उड़ान पिटारा — आर्ट फॉर द चेंज' प्रोग्राम आयोजित किया गया।

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सरकारी गर्ल्स स्कूल व कॉलेज की बालिकाएं देगी पीरियड सब्जेक्ट पर सजेशन, लगेंगे 5 हजार बॉक्स

सरकारी गर्ल्स स्कूल व कॉलेज की बालिकाएं देगी पीरियड सब्जेक्ट पर सजेशन, लगेंगे 5 हजार बॉक्स

जयपुर। वसुधा जन विकास संस्थान और राजस्थान ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को 'उड़ान पिटारा — आर्ट फॉर द चेंज' प्रोग्राम आयोजित किया गया। मालवीय नगर स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यभर के कलाकारों को अवार्ड व सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया। राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष लक्ष्मण व्यास इस अवसर मुख्य अतिथि रहे। जबकि खेड़ी राजपरिवार की सदस्य व सोशल एक्टिविस्ट वृंदा राठौड़ व राज्य की सबसे कम उम्र की सरपंच ऐश्वर्या राठौड़ विशिष्ट अतिथि थी।

राजस्थान के अलग—अलग हिस्सों के आर्टिस्ट ने सजेशन बॉक्स को पीरियड थीम पर पेंट किया था। उड़ान पिटारा नाम के इस प्रोजेक्ट में कलाकारों द्वारा करीब 500 बॉक्स पर रंगों के जरिए पीरियड सब्जेक्ट पर अलग—अलग संदेश दिए। इस अवसर पर इनमें से चयनित सजेशन बॉक्स की एग्जीबिशन भी लगाई गई।

वसुधा जन विकास संस्थान की निदेशक मोना शर्मा ने बताया कि राज्य के सरकारी बालिका स्कूलों व कॉलेजों में ये सजेशन बॉक्स लगाए जा रहे हैं। इसके तहत कुल 5 हजार सजेशन बॉक्स लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इन सजेशन बॉक्स में बालिकाएं अपनी हाइजीन से जुड़ी प्रॉब्लम लिखकर डाल सकेंगी। पीरियड सखी इन सभी प्रॉब्लम को लाकर विशेषज्ञों से इनके समाधान करवाएंगी।

कलाकारों ने पीरियड विषय पर अपनी कल्पना को सजेशन बॉक्स पर पेंट किया, ताकि स्कूलों व कॉलेजों की बालिकाओं तक कला के जरिए इस विषय पर जागरूकता आ सके। वसुधा जन विकास संस्थान की निदेशक मोना शर्मा ने बताया कि ये बॉक्स राजस्थान के विभिन्न सरकारी बालिका स्कूलों में लगाए जा रहे हैं।

मुख्य अतिथि लक्ष्मण व्यास ने कहा कि दुनिया में जितनी भी क्रांति व बदलाव आए हैं, उनमें कला का काफी अहम रोल रहा है। राजस्थान ललित कला अकादमी हमेशा कला के जरिए किसी भी तरह के बदलाव को लाने में प्रमुख भूमिका निभाती रही है और आगे भी निभाती रहेगी। वृंदा राठौड़ ने कहा कि पीरियड्स आधी आबादी के शरीर का हिस्सा है, जिस पर बात करने के साथ—साथ काम करना भी बेहद जरूरी है। हर युवा महिला की जिम्मेदारी है कि जहां भी उसे मौका मिले, इस मिथक को तोड़ने में अपना योगदान दें।