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‘बलिदान’ में  कवि केसरी सिंह बारहठ के जीवन की झलक

'गीत आजादी' कार्यक्रम में दी देशभक्ति गानों की प्रस्तुति

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Sep 05, 2021

'बलिदान' में  कवि केसरी सिंह बारहठ के जीवन की झलक

'बलिदान' में  कवि केसरी सिंह बारहठ के जीवन की झलक


जयपुर।
देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देश भर में 'आजादी अमृत' का महोत्सव मनाया जा रहा हैं । इसी कड़ी में रवीन्द्र मंच सोसायटी की ओर से रविवार को राजस्थानी नाटक 'बलिदान' एवं 'गीत आजादी' के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने किया। उन्होंने रवीन्द्र मंच पर कलाकारों के लिए अधिकाधिक कार्यक्रम, वर्कशॉप इत्यादि आयोजित किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति गीतों के साथ हुई। युवा छात्र.छात्राओं की दमदार संगीत एवं धुनों के कार्यक्रम से सभागार जोशपूर्ण माहौल बन गया। इस कार्यक्रम में रागिनी, आरोही, त्रिवेणी, दीपांशा,रणजीत, वरूण, निखिल, महेश, मोहित, शिवकुमार ने गायन एवं तबले पर अनुपम शर्मा, ढोलक पर फतेह फारसी, कीबोर्ड पर आदित्य सिंह, हारमोनियम पर मधुर आदि ने भाग लिया।
इसके साथ ही राजस्थान के लोकनाट्य कार्यक्रम में लेखक अर्जुनदेव चारण लिखित एवं राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी एवं कवि केसरी सिंह बारहठ के जीवन से प्रेरित राजस्थानी भाषा के नाटक बलिदान का दमदार मंचन किया गया। रंग मस्ताने संस्था के द्वारा प्रस्तुत नाटक का निर्देशन जयपुर के रंगकर्मी अभिषेक मुद्गल ने किया।
नाटक में राजस्थानी संगीत के माध्यम से नाटक में यह भी बताया गया है कि केसरी सिंह बारहठ ने अपनी चेतावनी रा चुंगट्या कविता के माध्यम से उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह को अेग्रजों के दरबार में जाने से रोक दिया था। नाटक के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया हैं कि अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वालों को भी याद किया जाना चाहिए। नाटक में नवीन शर्मा, निपुण माथुर, गिरीश यादव, गरिमा सिंह,सारिका राठौड, प्रांजल उपाध्याय, स्मृति भारद्वाज, सुधांशु शुक्ला, साहिल,अंकित अद्विक,खालिद खान, जय भोजवानी आदि ने भाग लिया। वेशभूषा गरिमा सिंह,मंच सज्जा गिरीश यादव एवं मारवाड़ी भाषा प्रशिक्षण आशीष चारण ने की। गायन एवं हारमोनियम पर मोहित कुमार एवं अमित चौधरीए बासुंरी एवं ढपली पर रमन आचार्य ने संगत दी, संगीत जितेन्द्र शर्माका था।