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GOOGLE ने मधुमिता को दिया 1 करोड़ का सैलरी पैकेज, जानें क्या है राजस्थान कनेक्शन

पूर्व राष्‍ट्रपति कलाम को आइकॉन मानती यह लड़की, गूगल ने दिया एक करोड़ का पैकेज, राजस्थान कनेक्शन जानकर होगा गर्व।

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जयपुर

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Rajesh

May 08, 2018

Google gives one crore package to Jaipur Engineering college girl Madhumita

पटना के एक छोटे से कस्बे की रहने वाली मधुमिता शर्मा ने पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। उन्हें दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन और सबसे नामचीन कंपनी गूगल में नौकरी मिल गई है और 1 करोड़ रूपये सालाना का पैकेज मिला है। जी हां, 25 साल की उम्र में हर महिने ९ लाख रुपए कमाना...किसी के लिए भी सपने जैसा ही होता है लेकिन ये सपना मधुमिता के लिए उनके जीवन की सबसे यादगार हकीकत बन गई है। मधुमिता भले ही रहने वाली बिहार की हो लेकिन उनकी इस सफलता में राजस्थान का भी बहुत बड़ा योगदान है। आपको बता दें कि अपने परिवार या कहें कि खानदान से विदेश जाने वाली वह पहली शख्स हैं। अब चाहे आपको यकीन ना हो लेकिन बिहार की मधुमिता कुमार के लिए अब ये कोई सपना नहीं बल्कि हक़ीक़त है। एक ऐसी हकीकत जिसे जीने का लोग सिर्फ सपना देखते है।

आपको बता दें कि गूगल ने मधुमिता को स्विट्जरलैंड में अपने हेड ऑफिस में ज्वॉइन करने के लिए बुलाया है। मधुमिता को टेक्निकल सॉल्यूशन इंजीनियर के पोस्ट पर नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि मधुमिता ने इंजीनियरिंग से पहले की पढ़ाई पटना स्थित डीएवी स्कूल में की है। इसके बाद जयपुर के आर्या कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उनका बैच 2010-2014 था। गूगल में नौकरी शुरू करने के पहले वे बेंगलुरु में एपीजी कंपनी में काम कर रही थीं। शुरुआत में मधुमिता आईएएस बनना चाहती थीं पर बाद में उन्होंने इंजीनियरिंग को अपना करियर बनाया। उनके पिता के मुताबिक हाल के दिनों में उन्हें अमेज़ॉन, माइक्रोसॉफ़्ट और मर्सिडीज़ जैसे कंपनियों से भी ऑफ़र मिला था।

मीडिया से बातचीत में मधुमिता ने बताया की गूगल में काम करना उनका सपना था। गूगल में नौकरी पाने के लिए मधुमिता को सात राउंड में हुए इंटरव्यू को पास करना पड़ा। ये सातों इंटरव्यू अलग-अलग देशों में ऑनलाइन होते हैं। इसके लिए बैंगलूर में एक इंटरव्यू, सिडनी में दो, सिंगापुर में एक और स्विट्जरलैंड में तीन इंटरव्यू देना था। मधुमिता ने इंटरव्यू पास करने के लिए 6 से 7 महीने तक लगातार पढ़ाई की थी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और मधुमिता का सपना पूरा हो गया। वैसे इस मुकाम को हासिल करने में मधुमिता की महेनत और लगन के साथ जिस एक व्यक्ति की अहम भूमिका रही है वो हैं भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मशहूर वैज्ञनिक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम। "राष्ट्रपति ऐपीजे अब्दुल कलाम मधुमिता के सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी किताबें और बायोग्राफी वह हमेशा पढ़ती रहती है। उन्हीं के विचारों से मधुमिता ने प्रेरणा ली है।"

आज उनके पिता मधुमिता की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं। मधुमिता के पिता सुरेंद्र शर्मा आरपीएफ में सहायक कमांडेंट पद पर नियुक्त हैं। मधुमिता का एक भाई इंजीनियर और एक बहन डॉक्टर है। मधुमिता की मां हाउस वाइफ है। सुरेंद्र कुमार शर्मा याद करते हैं, "शुरुआत में मैंने कहा था कि इंजीनियरिंग का फील्ड लड़कियों के लिए नहीं है। लेकिन फिर मैंने देखा कि लड़कियां भी बड़ी संख्या में इस फील्ड में आ रही हैं। इसके बाद मैंने उससे कहा कि चलो एडमिशन ले लो। मधुमिता इसी साल फरवरी में पहली बार अमरीका गयीं थीं। गौरतलब है कि मधुमिता से पहले बिहार के ही वात्सल्य सिंह को माइक्रोसॉफ़्ट की ओर से करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी मिली थी।