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5 लाख पट्टों के लिए सरकार ने अभिलेखागार पर नजरें गड़ाई, भूमि मालिकाना हक विवाद खत्म करने की ढूंढी राह

प्रशासन शहरों के संग अभियान में टारगेट पूरा करने के लिए एडी से चोटी का जोर लगा रही सरकार

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5 लाख पट्टों के लिए सरकार ने अभिलेखागार पर नजरें गड़ाई, भूमि मालिकाना हक विवाद खत्म करने की ढूंढी राह

5 लाख पट्टों के लिए सरकार ने अभिलेखागार पर नजरें गड़ाई, भूमि मालिकाना हक विवाद खत्म करने की ढूंढी राह


जयपुर। राज्य सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान में 10 लाख पट्टे बांटने के टारगेट को पूरा करने के लिए एडी से चोटी का जोर लगा दिया है। सरकार ने इसके लिए अब राज्य अभिलेखागार के डिजिटाइज 20 लाख दस्तावेजों पर नज़रें गड़ा दी हैं। बरसों पुराने रिकॉर्ड के जरिए सरकार पुरानी बसवाट में पट्टे देने की तैयारी कर रही है। स्वायत्त शासन विभाग को उम्मीद है कि अभिलेखागार की मदद से अभियान के दौरान करीब 5 लाख पट्टे जारी किए जा सकते हैं। इसके जरिए नियमन के लिए भूमि के मालिकाना हक का विवाद दूर होगा।

स्पष्ट दस्तावेज नहीं, अभिलेखागार की भूमिका होगी महतवपूर्ण
पुरानी आबादी के इन इलाकों में लोग बरसों से निवास कर रहे हैं। इनमें अधिकतर लोगों के पास जमीन के मालिकाना हक के प्रमाणित व स्पष्ट दस्तावेज नहीं हैं। अभी तक मालिकाना हक के विवाद के चलते बड़ी संख्या में पट्टे नहीं जा सके हैं।प्रमाणीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिहाज का राजस्थान राज्य अभिलेखागार की अहम भूमिका होगी। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से कला एवं संस्कृति विभाग को पत्र भेजा गया है। सरकार का फोकस शहरों में पुरानी आबादी की भूमि के नियमन पर है।

रियासत काल के 20 लाख पट्टे डिजिटलाइज
राज्य अभिलेखागार बीकानेर ने वर्ष 1953 के पहले रियासत काल में जारी 20 लाख पट्टों को डिजिटाइज किया है। बड़ी संख्या में अभिलेखागार के पास ऐसे पट्टे भी हैं, जिनको डिजिटाइज नहीं किया गया। रियासत काल में जारी ये दस्तावेज, पट्टे या जमीन से जुड़े मालिकाना हक के अन्य दस्तावेज के तौर पर हैं। रियासत काल के होने के कारण ये दस्तावेज शहरों की पुरानी आबादी की भूमि के हैं। जिन 20 लाख प्रकरणों के दस्तावेजों को डिजिटाइज किया गया है, उनमें अधिकतर दस्तावेज बीकानेर संभाग के जिलों के हैं। बीकानेर संभाग के हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू और गंगानगर बीकानेर रियासत में ही शामिल थे। इन चारों जिलों के संपूर्ण दस्तावेजों के साथ ही अभिलेखागार के पास कुछ दस्तावेज जोधपुर व उदयपुर शहर के भी हैं।

इस तरह होगा काम
-बीकानेर स्थित अभिलेखागार के निदेशालय में 100 रुपए शुल्क देकर कोई भी अपनी जमीन के रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतिलिपि ले सकता है।
-बीकानेर संभाग के जिलों और जोधपुर व उदयपुर जिन भी शहरों का रिकॉर्ड भी अभिलेखागार में उपलब्ध है।
-स्वायत्त शासन विभाग चाहता है कि अभियान शुरू होने से पहले ऐसे सभी शहरों में अभिलेखागार की ओर से कियोस्क स्थापित किए जाएं।
-अभियान के दौरान पुरानी आबादी की भूमि से पट्टे देने के लिए विभाग की ओर से एक आम सूचना भी जारी की जाएगी। इसके माध्यम से लोगों से अपील की जाएगी कि वे अभिलेखागार से अपनी भूमि के रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतिलिपि लें।
-ऐसे दस्तावेज के आधार पर प्रशासन शहरों के संग अभियान के शिविर में भूमि का पट्टा जारी किया जा सकेगा।

जिनका रिकॉर्ड नहीं, वहां अलग प्रक्रिया
जिन शहरों का रिकॉर्ड अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं हैं, उनकी जमीनों के नियमन के लिए अलग प्रक्रिया लागू की जाएगी। ऐसे शहरों में पुरानी आबादी की भूमि का मालिकाना हक प्रमाणित करने के लिए बिजली व पानी के बिल प्रस्तुत करना जरूरी किया जा सकता है। साथ ही हाउस टैक्स की पुरानी रसीद व अन्य दस्तावेजों को भी आधार बनाया जा सकता है।