राजस्थान आवासन मंडल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनोज गुप्ता भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) पर भारी पड़े।
ओमप्रकाश शर्मा/जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनोज गुप्ता भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) पर भारी पड़े। एसीबी ने गुप्ता को गत वर्ष उसके कार्यालय से उस समय पकड़ा था, जब उन्होंने 25 हजार रुपए की रिश्वत स्वीकारते हुए राशि भगवान की तस्वीर पर प्रसाद के रूप में रखवाई। साक्ष्यों के आधार पर अदालत में चालान पेश करने के बाद एसीबी ने विभाग से अभियोजन की इजाजत मांगी तो जवाब 'इनकार' में मिला। विभाग ने पत्र में यह भी लिखा है कि 'इनकार' का अनुमोदन विभाग के मंत्री से करा लिया गया है। इसी के साथ गुप्ता को निलंबन से बहाल भी कर दिया।
मनोज गुप्ता के खिलाफ एसीबी ने कार्रवाई वर्ष 2020 में की थी। शिकायत थी कि अतिरिक्त मुख्य अभियंता गुप्ता ने ईडब्ल्यूएस डीआइ श्रेणी का रजिस्ट्रेशन करने के बदले 35 हजार मांगे। ठेकेदार के अकाउंटेंट से सौदा 25 हजार में तय किया। एएसपी नरोत्तमलाल वर्मा की टीम ने 15 जुलाई की सुबह सत्यापन किया। पकड़े जाने के डर से उसी शाम चार बजे रिश्वत की राशी कार्यालय में ही मंगवा ली।
खुद ने लिखी रिश्वत की रकम, एफएसएल ने की पुष्टी
आरोपी अधिकारी ने एसीबी से बचने के लिए रिश्वत की रकम बोलने के बजाय कागज पर अपने हाथ से 25 लिखा। तस्दीक के दिन ही परिवादी को शाम 4 बजे कार्यालय में ही बुलाया। कार्यालय में आधा घंटे बिठाए रखने के बाद उसने रिश्वत को प्रसाद की तरह भगवान की तस्वीर पर रखने के लिए कहा। एसीबी की रिकॉर्ड में अधिकारी की आवाज भी है। एसीबी ने साक्ष्यों के लिए उस पर्ची को जांच के लिए एफएसएल भेजा, जिसमें अधिकारी ने 25 लिखा था। एफएसएल ने अधिकारी ही लेखनी की पुष्टी की है।
साक्ष्य दरकिनार, नहीं चलेगा अभियोजन
तस्दीक में अधिकारी की आवाज, उनके कार्यालय में परिवादी के आधा घंटे बैठे रहने और रिश्वत की राशी रखने की आवाज तथा एफएसएल रिपोर्ट। ये सभी साक्ष्य धरे रह गए। एसीबी ने अभियोजन की इजाजत मांगी तो आवासन मंडल सचिव संचिता विश्नोई की तरफ से जवाब मिला कि अभियोजन की इजाजत नहीं दिए जाने का निर्णय किया गया है। इस निर्णय का अनुमोदन मंत्री स्तर कर कराया गया है।