जयपुर. ग्रेटर नगर निगम के विजनरी प्रस्ताव साधारण सभा की बैठक में पारित हो तो गए, लेकिन खाली खजाना और लोन से चल रही सरकार के सामने इन प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इन प्रोजेक्ट में 250 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने की संभावना है। पत्रिका ने पारित प्रस्तावों की पड़ताल की तो सामने आया कि इन प्रस्तावों पर खर्चा सहित अन्य प्रारंभिक जानकारी भी निगम अधिकारी नहीं जुटा पाए।
आर्थिक तंगी का आलम ये
-100 करोड़ रुपए का हुडको से निगम को लोन लेना पड़ा
-80 लाख रुपए के काम अब तक वार्डों में पूरे नहीं हो पाए
-20 करोड़ रुपए तो ठेेकेदारों के ही चल रहा बकाया
किसी भी प्लान का रोडमैप नहीं
1-सामुदायिक केंद्रों का अत्याधुनिक बनाना: निगम के पास 20 सामुदायिक केंद्र हैं। इनमें से पांच में सरकारी दफ्तर चल रहे हैं। शेष 15 का बुरा हाल है। सामुदायिक केंद्र पर डेढ़ से दो करोड़ रुपए खर्च होंगे। ऐसे में 25 से 30 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
2-सामुदायिक केंद्र में विश्राम स्थल: गर्मी के दिनों में सामुदायिक केंद्रों में विश्राम स्थल बनाने के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च होंगे।
3-खेल अकादमी : बेहतर खेल अकादमी खोलने पर निगम के 15 से 17 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कहां इसे विकसित किया जाएगा। ये तक प्रस्ताव में नहीं बताया गया है।
4-डबल बेसमेंट पार्किंग : निगम मुख्यालय के गार्डन एरिया में चार पहिया 200 वाहनों के लिए डबल बेसमेंट पार्किंग का निर्माण किया जाएगा, इसमें 40 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
5- ई चार्जिंग प्वॉइंट : ई चार्जिंग प्वॉइंट लगाने के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कमी: निगम यह तय नहीं कर पाया है कि इनको कहां लगाया जाएगा।
(निगम अभियंताओं से बातचीत के आधार पर)
कहां से आएंगे 146 करोड़ रुपए
नई सीवर लाइन डालने का प्रस्ताव भी पारित हुआ है। ग्रेटर निगम सीमा क्षेत्र में नई सीवर लाइन डालने के लिए 480 करोड़ रुपए की डीपीआर बनी है। अमृत 2.0 के तहत यह काम होगा। कुल राशि का तीस फीसदी (144 करोड़ रुपए) निगम को देने होंगे।
मालवीय नगर पुलिया से नंदपुरी नाले तक गंदे नाले के सौंदर्यीकरण पर 14.19 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें से 4.19 करोड़ रुपए निगम को देने हैं।
किस जोन में कितना होगा खर्च
जोन लागत (करोड़ में)
मालवीय नगर 88.98
विद्याधर नगर 12.98
झोटवाड़ा 40.51
मुरलीपुरा 69.26
मानसरोवर 98.06
सांगानेर 110.13
जगतपुरा 60.08
औसतन ये पैसा आता निगम के पास
-चुंगी कर के पेटे: 258 करोड़
-गैर कर राजस्व: 60 से 65 करोड़
-नगरीय विकास कर: 70 से 80 करोड़
-केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली ग्रांट: 230-235 करोड़
-अन्य आय: 18 से 20 करोड़