
मुंबई से सटे वसई में 7वीं मंजिल से गिरकर बच्ची की मौत
विकास जैन
जयपुर. राज्य के सरकारी अस्पताल में किसी मरीज की मौत होने के बाद परिजन के पास उसका शव ले जाने के लिए पैसे नहीं है तो अस्पताल की मेडिकल रिलीफ सोसायटी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। अस्पतालों में चिरंजीवी सहित अन्य नि:शुल्क योजनाओं से मरीजों का दबाव बढ़ने का तर्क देते हुए चिकित्सा विभाग ने यह नई व्यवस्था की है। हालांकि चिरंजीवी योजना में निजी अस्पताल भी हैं और वहां भी निर्धन वर्ग इलाज करवा रहा है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी के नियमों में संशोधन करते हुए 5 प्रतिशत राशि आपात समय में गंभीर बीमारी के शिकार मरीज के इलाज और शव परिवहन के लिए रखने के निर्देश दिए हैं।
आरएमआरएस इस मद पर कर सकेगी इतना खर्च
कॉटेज, वार्ड की साफ सफाई और अन्य सुविधाएं : 20 प्रतिशत
उपकरणों के रखरखाव : 10 प्रतिशत
नए अस्पताल के लिए उपकरणों की खरीद : 15 प्रतिशत
सोसायटी की ओर से संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों को मानदेय : 10 प्रतिशत
विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के नवाचार व कार्ययोजना : 10 प्रतिशत
निर्माण व मरम्मत : 25 प्रतिशत
सोसायटी के अन्य कार्यक्रम : 5 प्रतिशत
इमरजेंसी मद, दवा व शव परिवहन ः 5 प्रतिशत
निजी को नहीं किया शामिल
निजी में शव परिवहन के लिए वाहन उपलब्ध करवाने के इस नियम में निजी अस्पतालों को शामिल नहीं किया गया है। जबकि चिरंजीवी योजना निजी अस्पतालों में भी लागू है और यहां भी बीमा के जरिए निर्धन वर्ग भी इलाज करवा रहा है।
---
आरएमआरएस में यह व्यवस्था की गई है और सोसायटी सरकारी अस्पताल में ही होती है। यह नियम भी वहीं लागू होगा।
डॉ.रविप्रकाश माथुर, निदेशक जनस्वास्थ्य
Published on:
09 Mar 2023 01:00 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
