
महंगे ही नहीं सस्ते-सुलभ खाद्य पदार्थ भी देते हैं पोषण, पारंपरिक आहार लें
स्थानीय खानपान बेहतर
जंक, फास्ट और डिब्बाबंद खाने के बजाय ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रीय खानपान पर ध्यान दें। आहार में अपने क्षेत्र विशेष के अनुसार मोटा अनाज, छाछ-राबड़ी, जौ का दलिया, पंच मेल की दाल, घी, मसाले आदि का प्रयोग करें। बच्चों के आहार में भी इनका प्रयोग अधिक करें। इनसे जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति होगी।
सस्ते में भी है सब-कुछ
श रीर को पोषण देने के लिए जरूरी नहीं है कि आप महंगे खाद्य पदार्थों का ही प्रयोग करें। मौसम के अनुसार बाजार में जिन फल और सब्जियों की अधिकता है, उनका प्रयोग अधिक करें। ये खाद्य पदार्थ सस्ते होने के साथ ही शरीर के लिए अनुकूल भी होते हैं। इनसे विटामिंस और मिनरल्स की कमी दूर होगी।
ड्राई फ्रूट्स की जगह ये लें
ड्राई फूट्स से कई तरह न्यूट्रिएंट मिलते हैं लेकिन इनका प्रयोग हर किसी के लिए संभव नहीं है। महंगे ड्राई फू्रट्स के विकल्प के रूप में मूंगफली, तरबूज-खरबूजे के बीज, मखाने, साबूदाना, चना और जौ का सत्तू, मुरमुरे आदि का प्रयोग कर सकते हैं। अंकुरित अनाज को हल्का पकाकर खाएं। ये सभी बहुत पौष्टिक हैं।
संतुलित डाइट में हो ये सब
जरूरी विटामिन और मिनरल्स के लिए फल और सब्जियां लें। रोजाना आहार में ४०० ग्राम फल और सब्जियों प्रयोग करें।
रोटी, चावल, आलू और साबूत अनाज से कार्बोहाइड्रेट मिलता है आहार में इनका हिस्सा ३३ फीसदी होना चाहिए।
कैल्शियम, प्रोटीन और दूसरे जरूरी मिनरल्स के लिए आहार में १५ फीसदी डेयरी उत्पादों को शामिल करें।
संतुलित आहार में वसा की मात्रा केवल ०७ फीसदी ही होनी चाहिए।
पारंपरिक भोजन की ओर लौटें
घरों में पहले मिठाई बनाने के लिए चीनी की जगह गुड़ का प्रयोग होता था। गुड़ में आयरन के साथ ही कई माइक्रोन्यूट्रिएंट होते हंै। इसी तरह जौ, बाजरा, सत्तू, चावल आदि से बने पकवानों का महत्त्व भी कम होता जा रहा है। पारंपरिक खानपान पर ध्यान देकर कुपोषण से निपटा जा सकता है।
डॉ. सुमित नात्थनी
आयुर्वेद विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान, जयपुर
मेधावी गौतम
डायटीशियन,
जयपुर
Published on:
21 Dec 2020 07:14 am
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