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हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर को मिली राहत, हाईकोर्ट ने किया निलंबन आदेश रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट से मुनेश गुर्जर को बड़ी राहत मिली है।

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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट से मुनेश गुर्जर को बड़ी राहत मिली है। हेरिटज मेयर मुनेश गुर्जर के निलंबन आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट न्यायाधीश अनूप दंड ने निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रारंभिक जांच पुन करने के आदेश दिए है।

हाईकोर्ट में मुनेश की ओर से वकील ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रार्थिया का निलंबन नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39 के प्रावधानों व तथ्यों के विपरीत किया है। उसके खिलाफ जिन तथ्यों पर जांच हुई हैं, वे एफआईआर से ही साबित नहीं हो पाए थे। वहीं मामले में जांच अधिकारी नियुक्त करने का आदेश डीएलबी निदेशक ने निकाला, जबकि ऐसा आदेश राज्यपाल के निर्देशों के तहत ही जारी हो सकता है। इसके अलावा रूल्स ऑफ बिजनेस के तहत मेयर से संबंधित किसी भी कार्रवाई के लिए सीएम से भी अनुमोदन जरूरी है, लेकिन उनका निलंबन व जांच की कार्रवाई स्वायत्त शासन मंत्री के आदेश पर की गई है। जवाब में राज्य सरकार की दलील थी कि प्रार्थिया को जांच के बाद ही निलंबित किया है और उन पर रूल्स ऑफ बिजनेस बाध्यकारी नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निलंबन आदेश को रद्द कर दिया। जिससे मुनेश गुर्जर को बड़ी राहत मिली है।

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद मुनेश गुर्जर ने कहा कि मैं इस समय वैष्णो देवी आई हूं। मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है। मैं कांग्रेस परिवार की सदस्य हूं और रहूंगी। बता दें कि घर से 40 लाख और पट्टे की फाइलें बरामद होने के मामले में डीएलबी ने 17 अगस्त को नोटिस जारी कर मुनेश गुर्जर से जवाब मांगा था। मेयर ने जवाब में खुद को निर्दोष बताने के साथ घर से बरामद पैसे को परिवार की जमीन बेचने से जुड़ी राशि बताते हुए एसीबी के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। इस जवाब को जांच में सही नहीं माना गया और मुनेश गुर्जर को प्राथमिक जांच में मेयर के पद के दुरुपयोग का दोषी माना। स्वायत्त शासन विभाग ने 22 सितंबर को मुनेश गुर्जर को हेरिटेज मेयर और पार्षद पदों से सस्पेंड कर दिया था। दोबारा निलंबन के आदेश के खिलाफ मुनेश गुर्जर ने 26 सितंबर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

इससे पहले एसीबी ने 4 अगस्त को जयपुर हेरिटेज नगर निगम मेयर मुनेश गुर्जर के घर छापा मारा था। टीम ने मेयर के पति सुशील गुर्जर और दो दलालों को गिरफ्तार किया था। सुशील पर पट्‌टे बनाने की एवज में 2 लाख रुपए की घूस मांगने का आरोप था। मेयर के घर सर्च में 40 लाख रुपए नकद मिले थे, जिनको गिनने के लिए नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी थी। इसके साथ ही एक दलाल के घर भी 8 लाख नकद बरामद हुए थे। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग ने मुनेश गुर्जर को मेयर पद से निलंबित किया था।मुनेश गुर्जर ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 23 अगस्त को कोर्ट ने सरकार के निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी थी।