
रोचक रहा है राजस्थान कांग्रेस का इतिहास जानिए कैसे?
जयपुर। राज्य में लंबे समय तक सत्ता में काबिज रही प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे का इतिहास बेहद रोचक रहा है। 1948 से लेकर आज तक प्रदेश कांग्रेस में 23 प्रदेशाध्यक्ष बनें हैं लेकिन इन सबमें जो सबसे दिलचस्प बात है वो ये है कि 23 प्रदेशाध्यक्षों में पांच ऐसे भी हैं जिन्होंने इस पद पर दो बार अपनी भूमिका निभाई। यानी की कांग्रेस के पांच नेता ऐसे हुए हैं जो दो बार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बने, प्रदेश कांग्रेस का ये कारनामा किसी अन्य राज्यों में देखने को नही मिलता।
राजस्थान में गोकुल भाई भट्ट 26 जून 1948 को प्रदेश कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बनें और 21 जनवरी 2014 से आज तक तक सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस के 23 वें अध्यक्ष हैं। वहीं 1948 से लेकर 2014 के बीच प्रदेश कांग्रेस के पांच नेताओं को दो बार प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनने का मौका मिला। इन नेताओं में जय नारायण व्यास, मथुरादास माथुर, रामकिशोर व्यास, नाथुराम मिर्धा और अशोक गहलोत हैं।
इन नेताओं के दो बार के कार्यकाल पर नजर डालें तो जयनारायण व्यास का पहला कार्यकाल 12 जून 1949 से 10 मई 1951 और दूसरा कार्यकाल 1956 से 1957 तक रहा। इसी तरह मथुरादास माथुर 1957 से 2 जनवरी 1958, और 1960 से 11 मई 1962 तक दो बार अध्यक्ष रहे। इसके अलावा रामकिशोर व्यास 22 मई 1966 से 23 सितंबर 1967 और जनवरी 1978 से सिसंबर 1980 तक दो बार अध्यक्ष रहे। वहीं दिग्गज जाट नेता नाथुराम मिर्धा भी 24 सितंबर 1967 से 23 सितंबर 1971 तक और दूसरी बार 7 अगस्त 1977 से दिसंबर 1977 तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
इसी प्रकार राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी प्रदेश कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे हैं। गहलोत पहली बार 18 सितंबर 1985 से 8 जून 1989 तक अध्यक्ष रहे और दूसरी बार 1 दिसंबर 1995 से 14 अप्रेल 1999 तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा 23 अध्यक्षों में दो महिला नेता भी प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं।
लक्ष्मी कुमारी चुड़ावत 24 सिंतबर 1971 से 20 अप्रेल 1972 तक प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं। इसी प्रकार पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यास भी 15 अप्रेल 1999 से 16 जनवरी 2004 तक प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं।
Published on:
06 Aug 2019 07:20 pm
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