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Holi 2018: लगाने के 5 मिनट बाद ही छू मंतर हो जाएगा यह रंग, जानें होली पर क्यों खास है ये मैजिक कलर

Holi 2018: हर्बल गुलाल से लेकर डिजाइनर पिचकारियों के बीच लोगों की पसंद बना मैजिक कलर, बाजार में रंग—बिरंगी गुलाल से सजी है दुकानें  

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जयपुर

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Rajesh

Feb 26, 2018

Holi 2018: Holi in Rajasthan, Play holi with special magic colours

जयपुर। जीएसटी की मार के चलते इस बार बाजार में रौनक कम है। लेकिन होली खेलने को लेकर लोगों की उमंग में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। जैसे जैसे होली का पर्व नजदीक आ रहा है बाजार में रौनक आना शुरू हो गई है। बाजार में सस्ती गुलाल व रंग से लेकर महंगे हर्बल रंग और गुलाल की मांग बढती जा रही है। होली का त्योहार मनाने को शहर के बाजार रंग और गुलाल से गुलजार हो गए हैं। रंग, गुलाल व पिचकारियों की खरीदारी के लिए महिलाएं बच्चे और युवा पहुंच रहे हैं। इस बारे होली पर पारंपरिक रंगों से ज्यादा हर्बल रंगों की मांग है। लोग तिलक होली को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके लिए हर्बल गुलाल की मांग है। केमिकलयुक्त रंगों की बिक्री बहुत ही कम हो रही है।

वहीं इस बार होली के त्यौहार पर गुलाल और पक्के रंग के अलावा बाजार में रंगों में बहुत कुछ नया है। लोग मैजिक कलर छुमंतर को भी खूब पसंद कर रहे है। यह रंग कपड़ों पर डालने के बाद सुखने के साथ ही उड़ जाता है और कपड़े भी खराब नहीं होते। नील के रंग का ये कलर बच्चों को बहुत लुभा रहा हैं। इसके साथ ठण्डा और गर्म रंग भी काफी पसंद किया जा रहा है, इसको लगाते ही त्वचा पर ठण्डा और गर्म एहसास होता है। तो वहीं सिल्वर रंग पाउडर भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इसमें इसको जितना चाहे रगड़ लो फैलता जाएगा और चमकीला होने से सुंदर लगता है। रंगों के त्यौहार पर गोरा और काला रंग भी बच्चे शौक से खरीद रहे हैं। काले और सफेद रंग के इस रंग की खासियत ये है कि ये नहाने के बाद तुरंत साफ हो जाता है और एक शीशी में दो रंग बच्चों को काफी आकृषित करते हैं।

हर्बल गुलाल की मांग :

शहर के त्रिपोलिया बाजार, जौहरी बाजार, छोटी चौपड़, चांदपोल बाजार, राजापार्क, मानसरोवर, झोटवाड़ा सहित अन्य बाजारों में रंग व गुलाल की दुकानें सज गई हैं। बाजार में अलग-अगल खुशबू वाले गुलाल की मांग अधिक है। रंग विक्रेताओं की माने तो बाजार में पक्के रंगों की मांग धीरे धीरे कम होती जा रही है। लोग पक्के रंगों की बजाय गहरे हर्बल रंगों को पसंद कर रहे हैं। छोटी-बड़ी दुकानों में हर्बल कलर को प्राथमिकता दी जाने लगी है। गुलाब, मैजिक रंग और ब्रांड के साथ कई हर्बल रंग बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें गुलाब, मोगरा और लैवेंडर की खुशबू वाले गुलाल की अधिक मांग है।

अप्राकृतिक रंगों से बच रहे है लोग -

होली का त्योहार रंग और गुलाल के बिना अधूरा है। यहीं कारण है कि बाजारों में अभी से रंगों-गुलाल सहित पिचकारियों की बिक्री शुरू हो गई हैं। बच्चों को जहां रंग-बिरंगी विभिन्न तरह की पिचकारियां आकर्षित कर रही हैं वहीं लोग हर्बल गुलाल खरीदना अधिक पसंद कर रहे हैं।

झोटवाड़ा से रंग खरीदने आई वृतिका शर्मा कहती हैं कि अब अच्छी गुणवत्ता के रंग खरीद रही हूं। केमिकल रंग त्वचा को हानि पहुंचा सकते हैं। रंग खरीदने आई आशा चौधरी ने बताया कि बाजार में सिंथेटिक रंगों की भरमार है। ऐसे में असली और नकली की पहचान करना बड़ा मुश्किल है। सस्ता गुलाल चिप्स पाउडर से तैयार होता है। इनका दाम बीस से तीस रुपए तक है। वहीं रंग बीस रुपए से लेकर सौ रुपए प्रति रुपएदस ग्राम के भाव से उपलब्ध है।

फूलों से तैयार होते हैं हर्बल रंग -

त्रिपोलिया बाजार में पुस्तैनी रंग के विक्रेता नाशीर खान का कहना है कि इस बार बाजार में पक्के रंगों की तुलना में सुगंधित गुलाल और हर्बल रंगों की बहुत मांग है। वहीं, बाजार में केमिकल वाले पक्के रंगो को खरीदने का क्रेज काफी कम है। दुकानदार कहते हैं कि ऐसे में ज्यादातर ग्राहक हर्बल, सुगंधित गुलाल की मांग कर रहे हैं इनकी खुशबू भी प्राकृतिक होती है। यह ज्यादा समय तक चेहरे लगे रहने पर भी नुकसान नहीं पहुंचाता। गुलाल की खुशबू को बढ़ाने के लिए परफ्यूम का इस्तेमाल किया जाता है।


रंग विक्रेता मोहम्मद इरफान ने बताया बाजार में अरारोट से बनी खुशबूदार गुलाल 90 से 110 रुपए तक मिल रही है। हर्बल गुलाल का भाव तीन सौ से पांच सौ रुपए प्रतिकिलो तक है। बाजार में सिंथेटिक रंग और गुलाल बड़ी मात्रा में बिक रहा है जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। त्रिपोलिया बाजार में सालों से रंग गुलाल बेचने वाले ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि अब लोग हर्बल गुलाल की मांग ज्यादा कर रहे हैं। इसमें काले रंग के लिए आंवला पानी, पीले रंग के लिए हल्दी, और दूसरे रंग के लिए नीम, कुमकुम, बिल्व और अन्य प्राकृतिक चीजों का उपयोग किया जाता है।