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मोटे पैकेज की चाहत और रसूखदार स्वास्थ्य कर्मी पड़ रहे सरकारी अस्पतालों पर भारी

5 से 10 साल की पढ़ाई के बाद 75 प्रतिशत स्वास्थ्य कार्मिक नहीं जाना चाहते गांवों में.. शहरी जीवन शैली की चाहत, गांवों में सुविधाओं की कमी भी पड़ रहे भारी शहरों में अधिक निजी प्रेक्टिस और स्थानीय दखल भी कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को गांवों से दूर

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जयपुर

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Vikas Jain

Mar 10, 2022

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. 3 हजार छोटे अस्पतालों में से 2000 छोटे जिलों के गांवों में

विकास जैन

जयपुर. सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधारने के लिए चिकित्सा विभाग ने अधिशेष स्वास्थ्य कर्मियों को अपने मूल स्थान पर भेज व्यवस्था सुधारने की कोशिश तो की, लेकिन समस्या की मूल जड का समाधान अब भी नहीं ढूंढ पाया है। प्रदेश में इस समय करीब 3 हजार छोटे बड़े सरकारी अस्पतालों में से 2500 ऐसे जिलों में हैं, जो छोटे जिलों के हैं या सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं। जहां करीब 75 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मी बमुश्किल ही जाना चाहते हैं। जबकि कुल उपलब्ध करीब एक लाख नियमित स्वास्थ्य कर्मियों से इतनों की ही जरूरत गांवों के लिए हैं।

मौजूदा समय में अधिकांश स्वास्थ्य कर्मियों की पहली पसंद जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर और भरतपुर सहित अन्य कुछ दूसरे जिले हैं। अन्य जिलों में स्थानीय या उन जिलों के नजदीकी जिलों के मूल निवासी कार्मिक ही जाना चाहते हैं।

मरीजों की जरूरत पर वित्त विभाग की मंजूरी भारी

कोरोना काल में सामने आई विकटता के बीच राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य तंत्र सुधार पर फोकस का दावा सिर्फ तीसरी लहर की तैयारियों तक ही सीमित रह गया है। हालात यह है कि अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सेज सहित अन्य संवर्गों की जरूरत होने के बावजूद अनुमति के लिए वित्त विभाग की रोक टोक जारी है।

70 प्रतिशत स्वास्थ्य मेन पॉवर निजी क्षेत्र में

स्थिति यह है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सेज, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य आवश्यक संवर्गों के सैंकड़ों और हजारों पद रिक्त होने के बावजूद प्रदेश में उपलब्ध समस्त चिकित्सा संसाधनों का 70 प्रतिशत अब भी निजी क्षेत्र में ही है। जबकि प्रदेश के करीब 1.5 करोड़ मरीज हर साल सरकारी अस्प्तालों की सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।

निजी में भारी भरकम वेतन और सुविधाएं

निजी अस्पतालों में चिकित्सा के करीब करीब सभी संवर्गों को सरकारी से अधिक वेतन और सुविधाएं दी जाती हैं अधिक वेतन व सुविधाओं के बावजूद निजी अस्पतालों में मरीजों का दबाव कम रहता है

ऐसी स्थितियां सरकार के सामने...

विश्व स्वास्थ्य संगठन का तय मानक 1 हजार आबादी पर 1 डॉक्टर, हमारे सरकारी अस्पतालों में 8 हजार पर एक
निजी और सरकारी क्षेत्र का डॉक्टर—जनसंख्या कुल अनुपात 1700 लोगों पर एक, जो देश के अनुपात से 10 गुना अच्छा
सरकारी अस्प्तालों में करीब 50 हजार नर्सिंग कर्मी, निजी में यह संख्या करीब एक लाख से अधिक

राज्य का मौजूदा स्वास्थ्य ढांचा

35 जिला अस्पताल
5 सेटेलाइट अस्पताल
19 उप जिला अस्पताल
571 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र
2080 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
14 हजार से अधिक सब सेंटर
195 सिटी डिस्पेंसरी
249 ब्लॉक
50 हाई फोकस ब्लॉक
1600 से अधिक चिन्हित डिलीवरी प्वाइंट

फैक्ट फाइल

43 हजार पंजीकृत डॉक्टर
1700 है प्रदेश में डॉक्टर जनसंख्या अनुपात
9 हजार डॉक्टर ही कार्यरत
11 हजार डॉक्टरों के पद स्वीकृत
2 हजार पद रिक्त डॉक्टरों के
34 हजार डॉक्टर निजी क्षेत्र में दे रहे सेवाएं