
विकास जैन
जयपुर. राजधानी का जेकेलोन अस्पताल दुर्लभ बीमारियों का इलाज कराने के लिए एम्स जोधपुर की तरह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भले ही नहीं बन पाया है। लेकिन कई बच्चों की आस अब भी इसी अस्पताल से है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इन बच्चों का नि:शुल्क इलाज करने के आदेश दिए हैं, लेकिन सरकार ने बिना किसी बजटीय प्रावधान के अस्पतालों को ही कह दिया कि उनका इलाज अस्पताल के स्तर पर ही नि:शुल्क किया जाए। अस्पताल चार महीने से बाजार से उधारी पर दवाइयां मंगवाकर इन बच्चों को दे रहा है। नब्बे लाख रुपए की दवाइयां उधार लेने के बाद अब आगे की दवाइयां मिलने पर भी संकट खड़ा हो गया है।
जेकेलोन अस्पताल प्रशासन ने सालाना 10 करोड़ रुपए का बजट इन बच्चों का इलाज करने के लिए जारी करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा है।
चिरंजीवी, निरोगी राजस्थान में भी शामिल नहीं
इन बीमारियों के मरीज पूरी दुनिया में एकाध ही होते हैं। इनमें अधिकांश बच्चे ही हैं। कम मरीज होने के कारण इनकी दवाइयां भी महंगी होती हैं। इनका खर्च वहन कर पाना बच्चों के माता-पिता के लिए संभव नहीं है। राज्य में दवाइयां नहीं मिलने के कारण कुछ बच्चों की मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं। हैरत की बात यह है कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में चिरंजीवी बीमा सहित निरोगी राजस्थान योजना के तहत संपूर्ण कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन दुर्लभ बीमारियों के पैकेज इनमें भी शामिल नहीं हैं।
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दुर्लभ बीमारियों का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जोधपुर है, लेकिन इसके बावजूद जेकेलोन जयपुर में भी इलाज के लिए बच्चे आ रहे हैं। अभी तक निजी बाजार से 90 लाख रुपए की दवाइयां उधारी पर मंगवा चुके हैं। दस करोड़ के सालाना बजट के लिए सरकार से आग्रह किया है।
डॉ.कैलाश मीणा, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल
Published on:
12 Sept 2023 11:09 am
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