19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां लाख-दो लाख में शिकार, वहां 50 लाख में सौदा

बाघ के अंगों की तस्करी का अंतरराष्ट्रीय जाल

3 min read
Google source verification
बाघ के अंगों की तस्करी का अंतरराष्ट्रीय जाल

यहां लाख-दो लाख में शिकार, वहां 50 लाख में सौदा

अलवर.

सरिस्का में पिछले दिनों दो बाघों के शिकार में जहां एक ओर नित नए खुलासे हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को लेकर भी सनसनीखेज मामले सामने आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक स्थानीय शिकारी २०-३० हजार से दो लाख रुपए तक के लालच में बाघों को मौत के घाट उतार रहे हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघों के अंगों को २५ से ५० लाख तक बेचा जा रहा है। बाघिन एसटी-५ के अंगों को भी दिल्ली और गुडग़ांव में सवा-डेढ़ लाख रुपए में बेचने की बात सामने आई है। चीन, तिब्बत सहित अन्य देशों में बाघों की खाल, हड्डियां, दांत व नाखून सहित अन्य अंगों की मांग ज्यादा होने के कारण भारत में बाघों के शिकार की घटनाओं में वृद्धि हुई है। अकेले सरिस्का बाघ परियोजना में वर्ष २०१८ में फरवरी-मार्च महीने में एक बाघिन व बाघ का शिकार हो चुका है।

मध्यस्थ का कार्य करते हैं स्थानीय शिकारी
स्थानीय शिकारी तो एक छोटी कड़ी हैं, जो मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं। ये शिकारी बाघों का शिकार कर उसकी खाल, हड्डी, दांत व नाखूनों को दिल्ली व गुडग़ांव में वन्यजीव के अंगों की तस्करी से जुड़े अपराधियों को एक से दो लाख रुपए में बेच देते हैं। यहां से तस्कर वन्यजीव अंगों को बड़े अपराधियों तक पहुंचाते हैं। इनके संबंध अंतरराष्ट्रीय स्तर के तस्करों से होते हैं। देश की सीमा पार करा कर ये अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापारियों को 10 से 25 लाख रुपए में बेच देते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बाघ के अंगों की कीमत 25से 50 लाख रुपए तक पहुंच जाती है।

नेपाल व तिब्बत के रास्ते होती है तस्करी
बाघ के अंग भारत से नेपाल व तिब्बत की सीमा पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचते हैं। सरिस्का से बाघों के अंग गुडगांवा, दिल्ली तथा वहां से देश की सीमा पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचते हैं। सरिस्का के शिकारियों की पहुंच ज्यादातर दिल्ली व गुडग़ांव तक रही है। कुख्यात शिकारी संसार चंद्र के भी बड़े तस्करों से सम्बन्ध रहे हैं।

दवा व सजावटी आयटम में उपयोग
बाघों के अंगों की ज्यादा मांग चीन व तिब्बत में हैं। वहां बाघों की हड्डियां का उपयोग शक्ति वर्धक दवा बनाने में किया जाता है। हड्डियों का उपयोग सूप बनाने में होता है। वहीं दांत व नाखून का उपयोग ज्यादातर तांत्रिक क्रियाओं के लिए किया जाता है। वहीं बाघ की खाल का उपयोग सजावटी आयटम के रूप में किया जाता है।

चार घंटे में बाघिन का एक-एक अंग ठिकाने लगा दिया
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में पता चला है कि शिकारियों ने बाघिन एसटी-5 को मात्र तीन-चार घंटे में ही पूरी तरह ठिकाने लगा दिया, उसका एक-एक अंग व मांस, हड्डी आदि को शिकारी पोटली में बांध कर साथ ले गए। शिकार में मुख्य रूप से शामिल आरोपी बाघिन का रेडियो कॉलर भी ले गया। चार दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद गिरफ्तार शिकारी सरफुद्दीन को सोमवार को न्यायालय में फिर पेश किया जाएगा। इधर अभी भी इस मामले से जुड़े शेष चार अभियुक्त पकड़ से बाहर है। सरफुद्दीन ने बाघिन एसटी-5 के शिकार की बात तो स्वीकारी है, लेकिन इसकी असल पुष्टि बाघिन के दांत से बनाए ताबीज की बरामदगी पर टिकी है। ताबीज के बरामद होने पर दांत के डीएनए टेस्ट का बाघिन एसटी-5 की डीएनए रिपोर्ट से कराई जाएगी। यह मैच होने पर बाघिन एसटी-5 के शिकार की पुष्टि संभव हो पाएगी। बाघिन के शिकार का मामला आठ महीने पुराना होने, अभी तक मुख्य आरोपियों के पकड़ से बाहर होने के साथ ही उसके किसी अंग की बरामदगी नहीं हो पाने से बाघिन एसटी-5 की पुष्टि में सरिस्का प्रशासन अभी हिचक रहा है। इस बीच सरिस्का की टीमों ने गत 24 घंटों में समीपवर्ती भडोली, बालेटा व भरतपुर के एक गांव में दबिश देकर शिकार के उपयोग में ली जाने वाली कुल्हाड़ी, छुरी, जाल और एक बंदूक जब्त किए।