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एक्सीडेंट में पहले 10 मिनट में इलाज मिलने पर बचने की संभावना अधिक

देश में ट्रॉमा के कारण होने वाली मृत्यु अन्य मौतों से अधिक होती हैं। आंकड़ों की बात करें तो हर वर्ष करीब 4.5 लाख मौतें, एक्सीडेंट्स के कारण होती हैं। इनमें से करीब दो लाख युवा होते हैं, जिनकी उम्र 20-40 वर्ष के बीच होती है। वहीं, हर वर्ष करीब एक लाख लोग ट्रॉमा के चलते स्थाई रूप से दिव्यांग हो जाते हैं। सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मृत्यु तथा शारीरिक विकलांगता की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

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Kanpur Ghatampur Road Accident :मुंडन संस्कार की खुशियां मातम में बदली, खौफनाक मंजर देख दहले दिल

Kanpur Ghatampur Road Accident :मुंडन संस्कार की खुशियां मातम में बदली, खौफनाक मंजर देख दहले दिल

देश में ट्रॉमा के कारण होने वाली मृत्यु अन्य मौतों से अधिक होती हैं। आंकड़ों की बात करें तो हर वर्ष करीब 4.5 लाख मौतें, एक्सीडेंट्स के कारण होती हैं। इनमें से करीब दो लाख युवा होते हैं, जिनकी उम्र 20-40 वर्ष के बीच होती है। वहीं, हर वर्ष करीब एक लाख लोग ट्रॉमा के चलते स्थाई रूप से दिव्यांग हो जाते हैं। सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मृत्यु तथा शारीरिक विकलांगता की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

दुर्घटना से ऐसे बचें

क्या है सीपीआर?
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक जीवन रक्षक तकनीक है, जो हार्ट अटैक या ट्रॉमा होने पर धड़कन बंद होने की आपात स्थितियों में उपयोगी है। दिल का दौरा पड़ने, एक्सीडेंट या डूबने के बाद सांस न आने पर सीपीआर देने से व्यक्ति के शरीर में रक्त और ऑक्सीजन का संचार संभव है।

यह है तरीका

आपात स्थिति में 100-120 प्रति मिनट की दर से 30 बार के अंतराल पर छाती को दबाते हैं। दोनों हाथ जोड़कर हथेली का निचला हिस्सा छाती पर लाएं और छाती के केंद्र के निचले आधे हिस्से पर रखकर दबाएं। बहुत तेज दबाव भी न डालें। हर 30 बार के बाद मुंह से मरीज के मुंह में सांस भरें।

60 फीसदी की मृत्यु शुरुआती एक घंटे में

ट्रॉमा विशेषकर रोड एक्सीडेंट में जितनी भी मौतें होती हैं, उनमें 60 फीसदी की जान शुरू के पहले घंटे में चली जाती है। इनमें से भी करीब 50-60 फीसदी की मौतें शुरू के 10 मिनट में सही इलाज न मिलने के कारण चली जाती है। ऐसे में जरूरी होता है कि कोई भी ट्रॉमा हो तो मरीज को तत्काल मदद दी जानी चाहिए।

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