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सांभर झील संरक्षण के प्रयासों को झटका, नमक के कर्ज तले दबा एनजीटी का आदेश, नहीं हटीं केबल

करोड़ों रुपए के नमक कारोबार के आगे प्रशासन सहित विद्युत निगम के अधिकारी भी बौने रह गए हैं...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Sep 29, 2017

sambhar lake

कुचामनसिटी। सांभर झील के संरक्षण का सपना अब महज सपना ही बनकर रह गया है। करोड़ों रुपए के नमक कारोबार के आगे प्रशासन सहित विद्युत निगम के अधिकारी भी बौने रह गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में विद्युत निगम के अधिकारियों एवं प्रशासन को सांभर झील से अवैध विद्युत केबलें हटाने के आदेश दिए थे। प्रशासन ने नमक अधिकारियों से वार्ता की। विद्युत निगम ने नमक उत्पादकों को केबलें हटाने के नोटिस दिए। इसके बाद विद्युत निगम के अधिकारियों ने झील में पहुंच कर कुछेक जगह कार्रवाई की। एनजीटी ने इस मामले में अब विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक को 30 अक्टूबर तक कार्रवाई कर पालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

90 किलोमीटर में फैली है झील...
नागौर जिले के नावां कस्बे से अजमेर जिले के आऊ सिनोदिया होते हुए यह झील जयपुर जिले के सांभर तक कुल 90 किलोमीटर तक फैली हुई है। झील के नागौर व अजमेर जिले के क्षेत्र में ही अवैध रूप से नलकूप बनाकर विद्युत केबिलें बिछाई गई है। जहां अब भी हालात विकट हैं।

करोड़ों का कारोबार
झील में विद्युत निगम व प्रशासन की फौरी कार्रवाई के पीछे बड़ा कारण नावां का नमक उद्योग है। बोरवेल व विद्युत केबलें हटाई जाती हैं तो करोड़ों के नमक कारोबार बंद होने का अंदेशा है। गौरतलब है कि नावां में करीब 2 हजार नमक उत्पादकों की ओर से सांभर झील के पानी से 30 हजार मेट्रिक टन नमक का उत्पादन किया जाता है।

सामने आया सच
पत्रिका नेएनजीटी के आदेशों पर विद्युत निगम की कार्रवाई का सच जानने के लिए सांभर झील का जायजा लिया। टीम नावां से गैरआबाद ग्राम मोहनपुरा होते हुए जाब्दीनगर एवं गुढा-साल्ट तक पहुंची। इस बीच कहीं भी विद्युत निगम की कार्रवाई का असर नहीं दिखा। झील में अब भी तारों का जाल फैला है। जगह-जगह नंगे तार खुले पड़े हैं। जिससे हर समय करंट का अंदेशा बना रहता है।

- सांभर झील के नावां क्षेत्र में कार्रवाई की गई है और किशनगढ़ में भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एनजीटी के आदेशों की अक्षरश: पालना करवाई जाएगी।
मेहराम विश्नोई, प्रबंध निदेशक, अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, अजमेर