
Importance Of Gopashtami Worship Of Cow Gau Mata Puja Vidhi
जयपुर. कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी मनाई जाती है। गोपाष्टमी के दिन गाय, बछड़ों की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन गाय व बछडों की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस बार गोपाष्टमी 22 नवंबर को यानि आज मनाई जा रही है।
सनातन धर्म में गाय में सभी देवी—देवताओं का वास होने की मान्यता है। गोपाष्टमी के दिन गाय पूजन बहुत फलदायी होता है। कार्तिक शुक्ल अष्टमी को सुबह उठकर गाय को स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, रोली आदि से तिलक लगाकर उन्हें प्रणाम करें। गाय को पुष्प, अक्षत्, धूप अर्पित करें, दीपक से उनकी आरती उतारें।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार गौपूजा के बाद गौ माता को प्रसाद को अर्पित करना चाहिए। इस दिन ग्वालों या दूध विक्रेताओं का भी तिलक लगाकर सम्मान करना चाहिए। गाय—बछडों की परिक्रमा करें और उन्हें आसपास कहीं हरा चारा खिलाने ले जाएं। इससे गायसभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
22 नवंबर 2020 गोपाष्टमी शुभ मुहूर्त:
अष्टमी तिथि प्रारंभ- 21 नवंबर, शनिवार, रात 9.48 बजे से
अष्टमी उदया तिथि— 22 नवंबर, रविवार, गोपाष्टमी
गोपाष्टमी का समापन- 22 नवंबर, रविवार रात 22.51 बजे
Published on:
22 Nov 2020 08:08 am
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