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हड्डी टूटने पर अब प्लास्टर की जरूरत

हड्डी टूटने के बाद प्लास्टर लगाने की जरूरत नहीं,बल्कि अब टूटी हड्डी को नई तकनीक इमेज इंटेंसिफायर से जोडा जा सकेगा। ये नई तकनीक​ कई हॉस्पिटलों में अपनाई भी जा रही है।

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Aalok Sharma

Dec 11, 2015

हड्डी टूटने के बाद प्लास्टर लगाने की जरूरत नहीं,बल्कि अब टूटी हड्डी को नई तकनीक इमेज इंटेंसिफायर से जोडा जा सकेगा। ये नई तकनीक​ कई हॉस्पिटलों में अपनाई भी जा रही है।


इसके लिए आई नई तकनीक इमेज इंटेंसिफायर के जरिए हड्डी को बिठाया जाता है, फिर सूक्ष्म तारों के जरिए बिना चीरफाड़ किए ह्ड्डी को फिक्स कर दिया जाता है। एसएमएस अस्पताल के सामने बने ट्रोमा अस्पताल में भी अब इमेज इंटेंसिफायर के जरिए इलाज होने लगा है।


यह कहना है अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.आरसी मीणा का। वे शुक्रवार को इंडियन ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन के 60वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। दो दिन तक इस सम्मेलन में कार्यशालाएं आयोजित की गई।

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ये तकनीक ज्यादा बेहतर
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ.आरसी मीणा ने बताया कि ट्रोमा अस्पताल में इसी वर्ष तीन इमेज इंटेसिफायर मंगाए गए हैं। इसमें ग्रेड वन और ग्रेड-टू यानि सामान्य स्तर के फ्रेक्चर अब इसी तकनीक के जरिए ठीक किए जा रहे हैं। इस तकनीक के जरिए होने वाले इलाज के परिणाम पर परागत तकनीक से बेहतर हैं।


अब छोटा-सा चीरा ठीक करेगा टूटी हड्डी
सम्मेलन में एम्स से आए डॉ. प्रकाश कोटवाल ने बताया कि अब फ्रेक्चर की सर्जरी में लंबा चीरा लगाने की जरूरत नहीं है। माइक्रोसर्जरी के जरिए भी बेहतर सर्जरी की जा सकती है। केवल एक से दो सेमी के चीरे के जरिए भी फ्रेक्चर की सर्जरी की जा सकती है।


छोटा चीरा लगाने से खून की नसें नहीं कटती है, और इलाज में आसानी होती है। सम्मेलन में कलाई, कंधे, कोहनी, घुटने, एडी, हिप ज्वाइंट आदि के फ्रेक्चर पर चर्चा हुई।