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आरटीओ: जगतपुरा में ‘8’ पर ट्रायल, विद्याधरनगर में खानापूर्ति

राजधानी में विभाग के जगतपुरा और विद्याधर नगर कार्यालयों में अलग-अलग ट्रैक पर ट्रायल ली जा रही है।

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जयपुर

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Savita Vyas

Jan 19, 2019

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आरटीओ: जगतपुरा में ‘8’ पर ट्रायल, विद्याधरनगर में खानापूर्ति



जयपुर. परिवहन विभाग में स्थाई लाइसेंस के लिए होने वाली ट्रायल का ट्रैक किस डिजाइन का होना चाहिए, इसका जवाब खुद विभाग के पास ही नहीं है। हकीकत यह है कि राजधानी में विभाग के जगतपुरा और विद्याधर नगर कार्यालयों में अलग-अलग ट्रैक पर ट्रायल ली जा रही है। दोनों कार्यालयों में अलग-अलग नियम से ट्रायल हो रही है, लेकिन चालकों के समान स्थाई लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।
जगतपुरा में ट्रायल के दौरान चालकों को आठ और एच अक्षर की डिजाइन के ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना होता है। इसके बाद ही निरीक्षक चालक को पास करता है। मगर विद्याधर नगर में ऐसा कोई ट्रैक नहीं है। निरीक्षक एक छोटे से भूखंड पर ही चालक से आगे और पीछे कार चलवाकर पास कर रहे हैं। विद्याधर नगर में इससे पहले दूसरी जगह पर ट्रायल ली जा रही थी, जहां वैकल्पिक तौर पर आठ अक्षर तैयार कर ट्रायल शुरू की थी, लेकिन दो महीने से नए भूखंड पर बिना आठ और एच के ही ट्रायल ली जा रही है। आसान ट्रायल होने के कारण लोग विद्याधर नगर से ही लाइसेंस बनाने की इच्छा जता रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को राजस्थान पत्रिका ने स्टिंग कर विद्याधर नगर में स्थाई लाइसेंस के लिए हो रही धांधली को उजागर किया था।
वैकल्पिक तौर कहीं व्यवस्था नहीं : परिवहन विभाग की ओर से हाल ही ऑटोमैटिक ट्रैक पर ही ट्रायल लेने की कवायद शुरू की है। इसके लिए परिवहन कार्यालयों में ऑटोमैटिक ट्रैक बनाने की तैयारी है। जगतपुरा में ट्रैक बनकर तैयार है, लेकिन शुरू नहीं किया। यहां वैकल्पिक तौर पर आठ और एच पर ट्रायल ले रहे हैं।
निरीक्षक को हटाया, उडऩदस्ते में लगाया
इधर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद कार्रवाई करते हुए आरटीओ ने विद्याधर नगर में लाइसेंस शाखा में लगे निरीक्षक को हटा दिया है, जिसे उडऩदस्ते में लगाया है।
जानिए कैसा होगा ट्रायल
पहले टेस्ट में यातायात नियमों की पालना करते हुए 8 का अंक बनाना जरूरी
दूसरे टेस्ट में अंग्रेजी के एच अक्षर की तरह गाड़ी चलाना जरूरी
तीसरे टेस्ट में गाड़ी पार्क करके दिखानी होती है
चौथे टेस्ट में गाड़ी चढ़ाते समय पीछे नहीं खिसकनी चाहिए

जो भी नियम हैं, समान होने चाहिए। अगर ऐसा है तो वैकल्पिक तैयार करवाया जाएगा। इसके लिए आरटीओ को निर्देशित किया जाएगा।
महेन्द्र प्रताप सिंह, डिप्टी कमिश्नर प्रवर्तन, परिवहन विभाग