
सीए ने बताई केपिटल गेन की बारीकियां
आप सैलरी पाने वाले व्यक्ति हैं, तो आपके लिए आपकी सैलरी में ही टैक्स छूट के कई रास्ते उपलब्ध हैं। देश में सैलरी वाले लोग सबसे अधिक टैक्स देते हैं, इसलिए सरकार भी इन पर मेहरबान रहती है। ऐसे लोगों को निवेश और खर्च पर तरह-तरह की टैक्स छूट दी जाती है। आपके खाते में सैलरी आती है, तो आपको यह जरूर पता होना चाहिए कि सैलरी स्ट्रक्चर क्या है। यानी आपकी सैलरी के साथ कौन-कौन सा अलाउंस जुड़ा हुआ है। आपको इन सभी अलाउंस को ध्यान में रखना है, क्योंकि इन्हीं पर टैक्स बचत की छूट मिलती है।
कर्मचारी प्रोविडेंट फंड
कंपनी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और भत्ते का 12 फीसदी ईपीएफ में निवेश करती है। इतनी ही राशि कंपनी को भी निवेश करना होता है। कर्मचारी के हिस्से के योगदान पर टैक्स छूट मिलती है, जो 1.5 लाख रुपए तक है। यह छूट आयकर कानून की धारा 80सी के तहत मिलती है। इस पर मिला ब्याज भी टैक्स छूट के दायरे में आता है।
हाउस रेंट अलाउंस
वेतन का यह हिस्सा कर्मचारी को मकान किराये के भुगतान के एवज में दिया जाता है। इस पर टैक्स छूट लेने के लिए जरूरी है कि यह वेतन का हिस्सा हो। तय सीमा के साथ एचआरए के लिए मिलने वाली राशि पर टैक्स छूट पाने के लिए क्लेम किया जा सकता हैं।
बच्चों की शिक्षा का भत्ता
बच्चे की फीस भुगतान के एवज में कंपनियां कर्मचारी को सालाना 1200 रुपए या महीने में 100 रुपए का एजुकेशन भत्ता देती हैं। यह सुविधा केवल दो बच्चों के लिए ही उपलब्ध है। इसके अलावा, आयकर कानून की धारा 80सी के तहत ट्यूशन फीस के भुगतान पर टैक्स छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं।
लीव ट्रेवल अलाउंस
देश में कहीं भी परिवार के साथ घूमने के लिए कंपनियां लीव ट्रेवल अलाउंस देती हैं, जिस पर टैक्स छूट मिलती है। ट्रेन, हवाई जहाज या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर पर ही यह छूट मिलती है। कर्मचारी बुक कराए गए टिकट को कंपनी में जमा कर छूट पा सकता है। चार साल में दो बार सफर करने पर ही इसका लाभ लिया जा सकता है।
40 हजार रुपए तक की छूट दी जाती है कर्मचारियों को स्टैंडर्ड डिडक्शन में
टेलीफोन और मोबाइल पर आए खर्च को टैक्स फ्री रीम्बर्समेंट में शामिल किया जाता है और कर्मचारी इस पर टैक्स क्लेम कर सकता है।
मोबाइल रीम्बर्समेंट
सैलरी पाने वाले लोग मोबाइल रीम्बर्समेंट पर टैक्स बचा सकते हैं। ऐसे लोगों को घर पर इस्तेमाल के लिए मोबाइल और टेलीफोन का खर्च मिलता है। यह भी सैलरी का ही एक हिस्सा होता है। टेलीफोन और मोबाइल पर आए खर्च को टैक्स फ्री रीम्बर्समेंट में शामिल किया जाता है और कर्मचारी इस पर टैक्स क्लेम कर सकता है। सैलरी पैकेज में टेलीफोन या मोबाइल का जितना बिल मिलता है, उसी राशि को या उससे कम की राशि को क्लेम कर सकते हैं। उससे ज्यादा टैक्स क्लेम की सुविधा नहीं मिलती।
स्टैंडर्ड डिडक्शन
सैलरी वालों के लिए सरकार ने 2018 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया था। इसके तहत सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को 40,000 रुपए की टैक्स छूट दी जाती है। यह डिडक्शन ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रीम्बर्समेंट पर दी जाती है। 19,200 रुपए के ट्रांसपोर्ट अलाउंस और 15,000 रुपए के मेडिकल रीम्बर्समेंट के लिए सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन का नियम शुरू किया। 2019 के अंतरिम बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन की 40,000 रुपए की राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया।
कार मेंटेनेंस अलाउंस से ले सकते हैं छूट
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को कार मेंटेनेंस अलाउंस भी देती हैं। इसके तहत कर्मचारी को कार के मेंटेनेंस, उसके डीजल या पेट्रोल का खर्च और ड्राइवर की सैलरी तक दी जाती है। इसके तहत कर्मचारियों को 2700 रुपए से लेकर 3300 रुपए तक प्रति महीने छूट मिल सकती है। इन सबसे जुडे़ं भुगतान आदि के हर कागजात, बिल को संभालकर रखना चाहिए ताकि छूट का दावा करते वक्त इनका इस्तेमाल किया जा सके।
Published on:
21 Aug 2022 10:01 pm
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