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विश्वास नहीं, घात लगा रहे नौकर

Crime Files : राजधानी जयपुर में नौकरों को लेकर बढ़ रहीं वारदात, आए दिन कहीं न कहीं मालिकों को बनाया जा रहा शिकार, किसी घर से कैश से किसी से जेवर उड़ाए जा रहे, दुकानों में भी चोरियों ने छीना चैन

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जयपुर

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Amit Pareek

Mar 28, 2022

विश्वास नहीं, घात लगा रहे नौकर

फाइल फोटो

नौकर! राजधानी की आबोहवा में यह नाम अब दूषित हो चला है। नौकर शब्द का उल्लेख अब विश्वास के साथ नहीं विश्वासघात के लिए किया जाने लगा है। कब कौन आस्तीन का सांप बन आपको डस ले कहा नहीं जा सकता। वर्षों पुराने नौकर की नीयत भी कब बदल जाए कहना मुश्किल है। कब कौन सा विश्वसनीय नौकर मालिक की आंखों में तागा डाल दे बता पाना सहज नहीं। कोई भी अखबार उठाकर देख लो किसी न किसी पन्ने पर नौकरनामा नजर आ ही जाएगा। नौकर की करतूत का कच्चा चिट्ठा देख अच्छे भले इंसान की भी जमीन खिसक जाए तो बड़ी बात नहीं। हर दिन शहर के किसी न किसी कोने से नौकर की ओर से की गई वारदात की स्याह तस्वीर सामने आ ही जाती है। कहीं नशीला पदार्थ खिला तिजोरी साफ करने वाला नौकर दिख जाता है तो कहीं ज्वैलरी दुकान से सोना चुराकर भाग जाता है। इन सबसे अलग किसी ओर के जरिए वारदात करवाने वाले शातिर अपराधी भी नौकर के वेश में हमारे बीच मौजूद हैं।

व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर भी खूब कर रहे ट्रैंड

ऐसा नहीं है कि ये नौकर आसमान से उतरे हों और फिर वारदात को अंजाम दे गायब हो गए हों। ये हमारे ही बीच रहते हैं विश्वास जमाते हैं फिर मौका पाकर मालिक की आंख का काजल चुरा ले जाते हैं। कुछ दिन भूमिगत हो अपना नया ठिकाना चुनकर फिर से बिसात बैठाने लगते हैं। पिछले कुछ दिन से नौकर शब्द शहर के कई व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर ट्रैंड कर रहा है। कहीं पर इनकी साजिश की कहानियां बताई जा रही हैं तो कहीं पर नौकरों से सतर्क रहने को कहा गया है। कहीं नौकरों के कथित हुनर की बारीकियां समझा सावधान किया जा रहा है। कुछेक चर्चाओं में तो अखबार की कतरनें और वारदात के वीडियो क्लिप्स तक शेयर किए जा रहे हैं। क्राइम सीन रिक्रिएट कर कहा जा रहा है कि उद्देश्य बताना नहीं बचाना है। किसी वीडियो में नौकर तिजोरी तोड़ रहा है तो किसी में घर से भागता दिख रहा है। कहीं नशीला खाना बनाते तो किसी क्लिपिंग में खिलाते नजर आ रहा है।


पुलिस भी वारदात-दर-वारदात से परेशान

शहर में नौकरों की ओर से लगातार हो रही वारदात से पुलिस भी परेशान है। नौकर की एक करतूत खुलती नहीं उससे पहले दूसरी सामने आ जाती है। सवाल यह उठता है कि ये सब रुके कैसे? इस पर खाकी का कहना है कि लोग घर या दुकान को लेकर कितने ही सुरक्षा के इंतजाम कर लें लेकिन जब नौकर की बात आती है तो आंख मूंद लेते हैं। कोई बैकग्राउंड नहीं खंगाला जाता। वैरिफिकेशन तो दूर की बात है वह कहां से आया और कहां रह रहा है इसकी भी मालिक को खबर नहीं होती। घरेलू नौकर के संदर्भ में तो स्थिति और बुरी होती है। नौकर पहले कहां काम करता था, वहां से क्यों छोड़ा? मालिक को इन सवालों से कोई सरोकार ही नहीं होता। ऐसे में पुलिस का मानना है कि नौकर रखने से पहले उसके इतिहास की पूरी जानकारी निकालना जरूरी है। साथ ही उसकी कुंडली भी देखें कहीं किसी घर में पहले से कोई अपराध तो नहीं बैठा था यह जानना जरूरी है। साथ ही किसी अधिकृत एजेंसी के जरिए ही नौकर रखें लेकिन अच्छे से ठोक-बजाकर पहले इत्मीनान कर लें। साथ ही नौकरों के सामने अपनी संपत्ति, कैश-जेवर से जुड़े सीक्रेट्स आदि भी शेयर न करें।