
घर में तनाव का माहौल बच्चों को बना रहा मुंहफट और झगड़ालू
पति-पत्नी के बीच झगड़े, पारिवारिक कलह या फिर पड़ोसियो से कहा-सुनी अक्सर छोटे बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालती है। ऐसे माहौल से बच्चे अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर (एडीएचडी) के शिकार हो रहे हैं। यह एक ऐसी मानसिक मानसिक बीमारी है जिसमें बच्चे बिना कुछ सोचे समझे हाइपर, बेतुका जवाब और झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। मनोविज्ञानियों के अनुसार बच्चे अक्सर यह सब अपने मा-बाप, परिवार या फिर आस-पड़ोस से सीखते हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फोर्मेशन (एनसीबीआई) के अध्ययन की मानें तो करीब 11.32 फीसदी बच्चे एडीएचडी से ग्रसित हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर और विशेषज्ञ
डॉक्टरों के अनुसार ऐसे बच्चों के मस्तिष्क का विकास अन्य बच्चों की तुलना में कम होता है। कई बार माता-पिता बच्चों के सामने झगड़ा और मार-पीट करते हैं। बच्चा जब इसे देखता है तो उसके दिमाग पर इसका बेहद नकारात्मक असर होता है। माता-पिता अक्सर इन लक्षणों को अनदेखा करते हैं और बच्चा धीरे धीरे मां-बाप की तरह अपने साथियाों या फिर भाई-बहन से हाइपर होकर बात करने लगता है। जेके लोन अस्पताल में हर दिन इस तरह के 5 से 10 मामले आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई मामलों में एडीएचडी आनुवांशिक भी होता है।
केस 1
विद्याधर नगर निवासी मुक्ता अग्रवाल (परिवर्तित नाम) ने बताया कि घर के माहौल के चलते उनके 8 साल के बेटे को बात-बात पर गुस्सा आता है। कई बार इतना गुस्सा कि बातचीत में भी दिक्कत होती है। उसे स्कूल भेजते हमेशा डर बना रहता कि दूसरे बच्चों के साथ मारपीट न कर दे। वे बच्चे की काउंसिलिंग भी करा रही हैं।
केस 2
आदर्श नगर की पूजा गौतम (परिवर्तित नाम) ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान पारिवारिक कारणों से उन्होंने काफी स्ट्रेस लिया। घर में हमेशा तनाव का माहौल रहता था। जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा और फिर उनकी बेटी पर। उनकी 5 साल की बेटी को जन्म से ही एडीएचडी डिसऑर्डर है, जिसका इलाज चल रहा है।
बच्चों पर इस तरह बुरा असर-
बचपन से ही क्रोध का स्तर बढऩा
कभी भी कुछ भी बोल देते हैं
ध्यान और आत्म नियंत्रण प्रभावित
अचानक हाइपर होने की आदत
कक्षा में एकाग्रता से बैठ नहीं पाते
हमेशा खिलौने तोड़ते- फोड़ते रहते हैं
बिना बात अक्सर रोने लगते हैं
जरूरत से ज्यादा सक्रिय होना
पल पल चीजे बदलते रहते हैं
घर में ऐसा माहौल बच्चों के लिए खतरनाक-
बच्चों पर समुचित ध्यान नहीं देना
माता-पिता का अपने कामों में व्यस्त रहना
बच्चों के सामने चिल्लाना और झगडऩा
मां का गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार नहीं लेना
शराब, तंबाकू का सेवन करना
बच्चों को दें बिहेवियर थैरेपी
हाइपरएक्टिव बच्चों को दें बिहेवियर थैरेपी और सत्र ज्वाइन करवाएं , घर का माहौल हमेशा सकारात्मक रखें तथा
बच्चों को गेम या अन्य दिमागी गतिविधियों में व्यस्त रखें। बच्चे के पोषण के अलावा उसकी बात को गंभरता से ने और जवाब दें।
- डॉ.अशोक गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ, जेके लोन
Published on:
01 May 2023 05:38 pm
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