
चेन्नई. यहां आयोजित सीआइआइ तमिलनाडु इंफ्रास्ट्रक्चर शिखर सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. आनंद नटराजन ने कहा यदि भारत को जलवायु अस्थिरता के दौर में आर्थिक वृद्धि बनाए रखनी है तो जल को सड़कों और बिजली नेटवर्क की तरह योजनाबद्ध, निर्मित और वित्तपोषित करना होगा। उन्होंने कहा दशकों तक जल को मुफ्त संसाधन मानने से बर्बादी, निवेश की कमी और बाढ़ व सूखे जैसी चुनौतियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है। नटराजन ने जोर दिया कि जल सुरक्षा को कृषि, उद्योग और शहरीकरण की रीढ़ मानते हुए इसे आर्थिक अवसंरचना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने भंडारण, भूजल पुनर्भरण, अपशिष्ट जल पुन: उपयोग, समुद्री जल शोधन और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
फ्री सार्वजनिक नीति का सबसे महंगा शब्द
उन्होंने शहरी नियोजन की आलोचना करते हुए कहा झीलों और जलाशयों पर निर्माण तथा ऊर्ध्वाधर विकास पर रोक ने चेन्नई जैसे शहरों में बाढ़ और जल संकट दोनों को बढ़ाया है। नटराजन ने चेतावनी दी कि यदि सेवाओं की कीमत लागत से कम रखी गई तो अवसंरचना टिकाऊ नहीं रह पाएगी। उन्होंने कहा फ्री सार्वजनिक नीति का सबसे महंगा शब्द है। प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जल सभ्यता की नींव है और आधुनिक भारत को इसे अपनी अवसंरचना रणनीति के केंद्र में रखना होगा।इसी सम्मेलन में तमिलनाडु के सार्वजनिक कार्य एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुना ने कहा मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार का पहला बजट केवल वार्षिक खर्च दस्तावेज़ नहीं होगा, बल्कि राज्य के विकास के लिए दीर्घकालिक दृष्टि प्रस्तुत करेगा। उन्होंने पारदर्शिता और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर आधारित परियोजनाओं की घोषणा की, जिससे सतत आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा।
Updated on:
05 Aug 2026 06:01 am
Published on:
05 Aug 2026 06:01 am
