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मंत्रदीक्षा से होता है श्रद्धा, एकाग्रता और संस्कारों का संवर्धन : मुनि

जयपुर

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Newsdesk

Aug 05, 2026

Rajasthan

चेन्नई. ट्रिप्लीकेन तेरापंथ भवन में चातुर्मास के प्रथम रविवार को मुनि डॉ. पुलकित कुमार के सान्निध्य में मंत्रदीक्षा कार्यक्रम हुआ। उन्होंने प्रवचन में कहा नवकार महामंत्र केवल एक मंत्र नहीं, जीवन को संस्कारित, संयमित और सकारात्मक बनाने का सशक्त माध्यम है। मुनि ने बताया मंत्रदीक्षा से श्रद्धा, एकाग्रता और संस्कारों का संवर्धन तथा नियमित जाप से आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।



इस अवसर पर चेन्नई की 13 ज्ञानशालाओं के 42 बच्चों ने श्रद्धापूर्वक मंत्रदीक्षा ग्रहण कर अपने आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की। अभातेयुप के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश डागा ने “किशोर दिवस” की प्रेरणा पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को धर्म, संस्कार और संगठन से जुड़े रहने का संदेश दिया। तेरापंथ किशोर मंडल द्वारा प्रस्तुत नाटिका पेश की गई। सुरेश सुराणा, राजेश नाहर, गौतम सेठिया, राकेश जैन, स्वरूप दांती, मुकेश अच्छा और राजेश सांड ने भी विचार व्यक्त किए।

उपस्थित थे अनेक गणमान्य लोग

प्रायोजक रणजीतमल, अक्षय और ध्रुव छल्लाणी परिवार ने बच्चों को माला, मुंहपट्टी, आसन और मंत्रदीक्षा पुस्तक भेंट की। स्वागत भाषण कोमल डागा ने दिया, संचालन हर्ष गादिया ने किया और संयोजन दीपक श्रीश्रीमाल ने किया। मंत्री श्रीकांत चोरड़िया ने सभी संत-साध्वियों, अतिथियों, प्रायोजक परिवार और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में भरत मरलेचा, चेन्नई सभाध्यक्ष महेंद्र मांडोत, ट्रिप्लीकेन ट्रस्ट पदाधिकारी, तेरापंथ महिला मंडल की टीम सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।