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विरासत का संग्रहालय: सवा सौ साल से संजोए है 20 हजार 400 पुरा सामग्री का इतिहास

International Museum Day जयपुर। साल 1983 में 18 मई को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता और उसके महत्व को समझते हुए अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया, राजधानी जयपुर में भी संग्रहालय दिवस मनाने की परंपरा को आज भी निभाया जा रहा है।

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विरासत का संग्रहालय: सवा सौ साल से संजोए है 20 हजार 400 पुरा सामग्री का इतिहास

विरासत का संग्रहालय: सवा सौ साल से संजोए है 20 हजार 400 पुरा सामग्री का इतिहास

International Museum Day जयपुर। साल 1983 में 18 मई को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता और उसके महत्व को समझते हुए अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया, राजधानी जयपुर में भी संग्रहालय दिवस मनाने की परंपरा को आज भी निभाया जा रहा है। यहां एकमात्र सरकारी संग्रहालय अल्बर्ट हॉल करीब सवा सौ साल से अधिक समय से 20 हजार 400 पुरा वस्तुओं को संजोए हुए है, जिन्हें हर साल 7 लाख से अधिक पर्यटक देखने पहुंचते है। यह संग्रहालय प्राचीन समृद्ध परंपराओं को समेटे हुए है।

साल 1876 में प्रिंस आॅफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड के जयपुर आगमन के दौरान अल्बर्ट हॉल की नींव रखी गई। अल्बर्ट हॉल का निर्माण साल 1887 में पूरा हुआ। इसके साथ ही पुरानी विधानसभा में प्रदर्शित कला वस्तुओं को यहां रखा गया। इस संग्रहालय में भारतीय—ईरानी स्थापत्य के साथ पाषाण अलंकरण मुगल—राजपूत स्थापत्य से लिए गए। इसके गलियारे व बरामदे भित्ति चित्रों से सुसज्जित है, वहीं अकबर कालीन 'रज्मनामा और धार्मिक चित्रों की प्रतिकृतियां भी बनी हुई है। इस संग्रहालय में पर्यटकों को संस्कृति के साथ अन्य देशों की संस्कृति और सभ्यता देखनेे को मिल रही है। यहां बरामदें में यूरोप, मिश्र, चीन, ग्रीक और बेबिलोनिया सभ्यता की झलक देखने को मिल रही है।

तूतू नामक महिला की संरक्षित मृतदेह
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में मिस्र के पैनोपोलिस प्रदेश के अखमीन की तूतू नामक महिला की मृतदेह (ममी) को संरक्षित रखा गया है। साल 2011 में इस ममी का एक्सरे भी करवाया गया, जिसे यहां प्रदर्शित किया गया है। अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक राकेश छोलक ने बताया कि इस ममी के उपरी आवरण पर मिश्र का पंखयुक्त भृंग का प्रतीक अंकित है। वहीं यहां चार प्रेतात्माओं की आकृतियां भी अंकित है।

1632 की इरानी कालीन
अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक राकेश छोलक का कहना है कि अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में दुनिया की दूसरी सबसे प्राचीन चारबाग शैली की करीब 400 साल पुरानी कालीन भी देखने को मिल रही है। यह कालीन किरमान का बना है, जो 17वीं शताब्दी इरान के पूर्वाद्र्ध में कालीन बुनाई का प्रमुख केन्द्र था। इस कालीन को आमेर महलों के लिए मिर्जा राजा जयसिंह के समय 1632 में खरीदा गया। इस कालीन की बुनाई चारबाग प्रकार के इरानी बगीचे के आधार पर हुई। पूरी कालीन को पानी की नहरों से चार भागों में बांट दिया गया है। इस कालीन का ताना चौहरा सूती धागों का है और बाना भूरे रंग की उनी और रेशमी धागों की दुहरी गांठों का है। इस कालीन की लंबाई 28 फीट 4 इंच और चौडाई 12 फीट 4 इंच की है।

जयपुर पाषाण मूर्तियां मौजूद
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में चौंथी से 12वीं शताब्दी के साथ् 19वीं शताब्दी की पाषाण मूर्तियां मौजूद है। संग्रहालय में नवग्रह पट्ट और गणेशजी, दशावतार और महिषासुरमर्दिनी, शिव परिवार, वैष्णव और ब्रह्मा परिवार, जैन तीर्थंकर की मूर्तियां मौजूद है।

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