
भुसावर (भरतपुर) वैर विधानसभा के गांव उमरेड़, बागरेन व खरेरी में पैदा होने वाला पान देश -विदेश में अपनी सुगंध फैला रहा है। यहां जैविक तरीके से पान की खेती हो रही है। तमोली जाति के किसानों का रुझान इस ओर ज्यादा है। यहां का पान दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई अन्य राज्यों के साथ ही मुस्लिम देशों में भी जाता है।
गर्मी से बचाने के उपाय
पान उत्पादक पदम, चंदन सिंह, लज्जा देवी तमोली ने बताया, फसल को गर्मी से बचाने के लिए पान की बेड के ऊपर और बगल में घास -फूंस की टटिया लगाई जाती हैं और लगातार पानी का छिड़काव किया जाता है।
विभिन्न किस्में : देसी पान, बनारसी पान, कोलकाता पान, अवनी पान
दवा के रूप में भी उपयोगी
पान भोजन पचाने के अलावा शक्ति वर्धक और विभिन्न प्रकार की दवाओं में भी काम आता है। किसानों ने बताया, यहां का पान दिल्ली और आगरा की मंडी में जाता है। वहां से देश के कई राज्यों को जाता है। यहां के पान की मांग मुस्लिम देशों ईरान, इराक, पाकिस्तान व अफगानिस्तान में भी अधिक है।
फंटी के सहारे अच्छी ग्रोथ
&जड़ों में सरसों की खल, शहद, दूध, दही, गोबर की खाद और मदिरा आदि पदार्थ डाले जाते हैं। जब पान का पौधा छह महीने का हो जाता है तो उसे फंटी या बांस के डंडे की सहायता से ऊपर चढ़ाया जाता है। सात -आठ हफ्तों के बाद पत्तों को अलग किया जाता है। इसे पीढ़ी का पान कहते हैं। बाजार में इसकी विशेष मांग होती है। पान में बहुत सी वैरायटी होती है और उसके अनुसार पैसा मिलता है। - किसान चंदन तमोली
तमोली जाति का रुझान
&क्षेत्र में कई वर्षों से जैविक तरीके से पान की खेती की जा रही है। इनमें अधिकतर तमोली जाति के किसान हैं। यहां का पान देश के साथ ही विदेशों में खास कर मुस्लिम देशों में भी जाता है।
Updated on:
01 Jun 2024 01:26 pm
Published on:
01 Jun 2024 01:26 pm
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