
JAGDHATRI POOJA 2020 DURGA POOJA MAA DURGAPUJA UTSAV
जयपुर. माता जगद्धात्री मां दुर्गा और मां काली का ही एक स्वरूप हैं। तंत्र से उत्पन्न हुई मां जगद्धात्री की कार्तिक शुक्ल दशमी को पूजा की जाती है। इस दिन खासतौर पर पश्चिम बंगाल में जगद्धात्री पूजा उत्सव नवरात्र की तरह धूमधाम से मनाते हैं। इस अवसर पर भी नवरात्र के जैसे ही यहां चार दिवसीय पर्व मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत स्वामी रामकृष्ण की पत्नी शारदा देवी ने रामकृष्ण मिशन में की थी। दुनियाभर में रामकृष्ण मिशन सेंटर में यह त्यौहार मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार मां दुर्गा के पुनर्जन्म की खुशी में यह त्यौहार मनाते हैं। माता जगद्धात्री की पूजा मां दुर्गा की तरह ही की जाती है।
माता जगद्धात्री को देवताओं के मान—मर्दन के लिए जाना जाता है। कथा के अनुसार महिषासुर वध के बाद देवता स्वर्ग में अपना आधिपत्य जमा लेते हैं। देवताओं में घमंड आ जाता है और वे स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझने लगते हैं। उनके इस अभिमान को तोड़ने के लिए यक्ष को देवताओं के पहले पूज्य बनाया जाता है और वे एक-एक कर के सभी देवताओं का भ्रम समाप्त कर देते हैं।
इस प्रसंग के माध्यम से माता जगद्धात्री देवताओं को यह ज्ञान देती हैं कि उनके पास खुदका कुछ भी नहीं है। इसलिए वे अभिमान न करें। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि जिस मनुष्य में अहम का भाव नहीं होता उनपर माता जगद्धात्री प्रसन्न होती हैं। ऐेसे गुणवालों को ही माता की कृपा प्राप्त होती है।
Published on:
24 Nov 2020 10:59 am
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