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संत कबीर की भाव सलिला में दर्शकों ने लगाए गोते

अध्यात्म से सराबोर माहौल, सुरीली रसधार सी बहती कबीर वाणी, बैले में झलकते कबीर के भाव। कुछ ऐसा ही नजारा दिखा शनिवार को जवाहर कला केंद्र में। मौका था जवाहर कला केंद्र की ओर से सुरसंगम संस्थान के क्यूरेशन में आयोजित कार्यक्रम 'भाव सलीला' का।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jan 07, 2023


जयपुर। अध्यात्म से सराबोर माहौल, सुरीली रसधार सी बहती कबीर वाणी, बैले में झलकते कबीर के भाव। कुछ ऐसा ही नजारा दिखा शनिवार को जवाहर कला केंद्र में। मौका था जवाहर कला केंद्र की ओर से सुरसंगम संस्थान के क्यूरेशन में आयोजित कार्यक्रम ‘भाव सलीला’ का। गायिका संपत सैनी और लखनऊ घराने की कथक नृत्यांगना डॉ.विधि नागर ने सदियों से बहती संतों के भावों की सरस सलीला में गोते लगाने को मजबूर कर दिया। मैं तो उन सन्तन का दास जिन्होंने मन मार लिया भजन के साथ संपत सैनी ने गायन शुरू किया। सत्संग करके अनेकों तिर गए भजन में सत्संग की महिमा बताई गयी। इसके बाद संतों कूण आए कूण जाए, आपणों है ना रे कोई भजन पेश किए।
गुरु बिन जीवन, जाणे बिन नंबर का नोट
गुरु बिन जीवन यूं चले जाणे बिन नंबर का नोट, बाहर लाली प्रेम की भीतर भरया घणा खौट, थे तो आइयो गुरुसा म्हारे देश अंखियां दर्शन की प्यासी भई। जीवन में गुरु का महत्व भजन में जाहिर हुआ। संपत की प्रस्तुति में गुरु महाराज की महिमा के साथ राजस्थानी भाषा का सौंदर्य झलका। पवन कुमार डांगी ने ढोलक, सावन कुमार डंगी ने तबला तो हेमंत डांगी ने की-बोर्ड पर संगत की।

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सत्य के करीब ले गया कबीर द वीवर
डॉ. विधि नागर व उनके शिष्यों की बैले नृत्य नाटिका कबीर द वीवर बेहद खास रही। संत कबीर की सीखों की सशक्त अभिव्यक्ति इस प्रस्तुति में की गई जो उनके और करीब ले जाती है। हिन्दू कहूं तो मैं नहीं, मुसलमान भी नाहिं, पांच तत्व का पुतला गैबी खेले माहिंष शिष्यों को रोजमर्रा के जीवन से संदेश देते संत कबीर के दृश्य के साथ बैले शुरु होता है।
जिनको कुछ ना चाहिए वो ही शहंशाह कहलाए
सूत्रधार विधि नागर व अन्य कलाकारों ने कबीर के पदों व दोहे से तैयार गीतों पर आंगिक अभिनय से लबरेज नृत्य किया। मन लाग्यो मेरा यार फकीरी में, साहेब मेरा एक है दूजा कहा ना जाए, जिनको कुछ ना चाहिए वो ही शहंशाह कहलाए,झीनी झीनी भीनी रे चुनरिया जैसे गीतों पर कबीर रंगे में रंगे कलाकार थिरकते दिखे।
ह्रदय में निवास करते हैं ईश्वर
घट माही खेले अघट संसारसरीखे संवादों से बताया गया कि ईश्वर मानव के ह्रदय में निवास करते हैं। हमन का यार है हममें, हमन को होशियारी क्या विशेष वेशभूषा के साथ उक्त गीत पर नृत्य करते हुए कलाकारों ने द्वैत व अद्वैत के मिलन को दर्शाया। डॉ.विधि नागर के निर्देशन में अपराजिता पटेल, अदिति थपलियाल,रागिनी कल्याण, प्रिया दुब, पल्लवी जायसवाल,नेहा शर्मा, अमृत मिश्रा, शिवम शुक्ला, सौरभ दास, विशाल सिंह, अंशु कुमार शर्मा, धर्मराज ने बैले में हिस्सा लिया।