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किसी ने निर्दोष को मुलजिम बनाया तो किसी ने परिवादी को थाने में लाकर पीटा तो कोई ले रहा था सटोरियों से बंधी, 5 निरोक्षकों को नौकरी से बाहर निकाला

आज का किया, भविष्य में भुगतना पड़ेगा : शिकायतों के बाद भी नहीं सुधरे हालात तो दी अनिवार्य सेवानिवृत्त, डीजीपी ने चेताया : कौन क्या कर रहा है...सब पर नजर है

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अवैध शराब तस्करी: MP की शराब chhattisgarh में खपने पर जुबानी जंग छिड़ी

अवैध शराब तस्करी: MP की शराब chhattisgarh में खपने पर जुबानी जंग छिड़ी

जयपुर. राजस्थान पुलिस के मुखिया उमेश मिश्रा ने महकमे के सभी अधिकारी व कर्मचारियों को चेताया है कि कौन क्या कर रहा है...बस पर नजर है। मिश्रा ने सभी पुलिसकर्मियों को ईमानदारी व निष्ठापूर्वक काम करने की नसीहत दी है। राजस्थान पत्रिका से बातचीत में डीजीपी मिश्रा ने कहा कि लगातार गड़बड़ी करने वाले पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड एकत्र होता रहता है। अपराध में लिप्त पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया जाता है। वहीं अपराधियों से मिलीभगत व अन्य गड़बड़ी करने वालों का लगातार रिकॉर्ड खराब होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है। हाल ही पुलिस मुख्यालय ने पांच निरीक्षक, 6 उपनिरीक्षक और 8 मंत्रालियक कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है। इसके बाद पत्रिका ने निरीक्षकों की भूमिका की पड़ताल की तो पुलिस मुख्यालय के मुताबिक यह हकीकत सामने आई:-

1. निरीक्षक गणपतराम : वर्ष 2002 से 2021 तक 16 व 17 सीसीए से 9 बार दण्डित, मुलजिम की जानकारी होने पर उसे नहीं पकडऩा, अनुसंधान में गड़बड़ी करना
2. संजय कुमार शर्मा : वर्ष 2010 से 2017 तक 16 व 17 सीसीए से 8 बार दण्डित, जवानों से मंदिर के नाम पर चंदा लेकर स्वयं रखना, हेड़ कांस्टेबल द्वारा महिला कांस्टेबल से छेड़छाड़ करने के मामले में 20 हजार रुपए रिश्वत मांगना और अनुसंधान अधिकारी के समक्ष गलत बयान देकर उच्च अधिकारियों को गुमराह करना, महिला कांस्टेबल की छुट्टी की अर्जी आने के बाद बार-बार फोन कर परेशान करना
3. नरेन्द्र सिंह : वर्ष 1999 से 2017 तक 16 व 17 सीसीए से 7 बार दण्डित, बार-बार गैर हाजिर रहना, ड्यूटी पर शराब पीना, रिकॉर्ड खुर्द बुर्द करना, अनुसंधान में असमर्थ, फर्जी मेडिकल पेश करना

4. बनवारी लाल : वर्ष 2003 से 2021 तक 16 व 17 सीसीए से 17 बार दण्डित, मृतक की फोटोग्राफी नहीं करवाना, मुलजिम पेशी के बाद हथियार खुद के साथ घर पर ले जाना, संबंधित सीओ को सूचना दिए बिना एफआर लगाना, वीआइपी ड्यूटी से स्वेच्छा से गैर हाजिर होना, प्रकरण में आरोपी पक्ष को लाभ पहुंचाना, निर्दोष लोगों को मुलजिम बनाना, सटोरियों से मिलीभगत मासिक बंधी लेना, अनुसंधान में करने में असमर्थ

5. जितेन्द्र कुमार : वर्ष 2008 से 2015 तक 16 व 17 सीसीए से 6 बार दंडित, बिना रिकॉर्ड के परिवादी को थाने पर लाकर मारपीट करना, मृतक का मौका मुआयना नहीं करना और सीओ को इस संबंध में जानकारी नहीं देना, निजी कार मालिक की गाड़ी को हजारों किलोमीटर चलाकर किराया समय पर नहीं देना, चार्जशीट समय पर पेश नहीं करना, अनुसंधान में असमर्थ