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कलक्ट्रेट में अभिभावकों के साथ पहुंचे बच्चे, किया प्रदर्शन

डीएमडी बीमारी से पीड़ित बच्चों की सरकार से की इलाज की गुहार

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जयपुर

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Murari

Aug 19, 2023

जयपुर। मुख्यमंत्री जी दवा देकर हमारी जान बचाओ, मुख्यमंत्री जी मैं भी स्कूल जाना चाहता हूं, मोदी जी मैं भी जीना चाहता हूं, कुछ इसी तरह की गुहार लेकर ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) बीमारी से पीड़ित बच्चे शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और यहां अपनी मांगों के समर्थन में अभिभावकों के साथ इलाज की मांग की। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के इलाज में करोड़ो रुपए का खर्चा आता है।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कोर कमेटी ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक रामगोपाल शर्मा के नेतृत्व में डीएमडी बीमारी से पीड़ित बच्चे अपने इलाज के मांग को लेकर अभिभावकों के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। भारत माता के जयकारे के साथ इन बच्चों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपने इलाज की मांग की।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी कोर कमेटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक रामगोपाल शर्मा ने बताया कि पिछले 4 साल से ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए सरकार से मांग की जा रही है, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई प्रभावी और ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई। बच्चों के इलाज के लिए कई बार दिल्ली के चक्कर काट चुके हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के बाद बच्चों के अभिभावकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम से अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रथम को ज्ञापन भी सौपा। रामगोपाल शर्मा ने कहा कि सरकारों के इलाज के ‘प्रति अनदेखी के कारण डीएमडी से पीड़ित बच्चे अकाल मौत मर रहे हैं। इस बीमारी का इलाज करोड़ों में होने के कारण अभिभावक इसका इलाज कराने में असमर्थ है उन्होंने कहा कि फिलहाल इस बीमारी का इलाज यूएसए में जीन थैरेपी से हो रहा है और वहां एक बच्चे के इलाज पर करीब 28 करोड रुपए खर्च होता है। शर्मा ने कहा कि डीएमडी से पीड़ित बच्चे देश की भावी पीढ़ी है और उनकी जिंदगी बचाने के लिए सरकार जल्द से जल्द इलाज की व्यवस्था करें।

कोर कमेटी के राष्ट्रीय संयोजक रामगोपाल शर्मा ने बताया कि कोर कमेटी में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल है। पिछले मार्च में भी हमने बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली में भी धरना प्रदर्शन किया था और हमारी प्रदेश और केंद्र सरकार की यही मांग है कि इन बच्चों को इलाज देकर इनकी जिंदगी को बचाया जाए। उन्होंने कहा पूरे प्रदेश में करीब 3000 बच्चे डीएमडी बीमारी से पीड़ित हैं। इसमें बच्चों की न्यूनतम उम्र 4 साल होती है जबकि अधिकतम बच्चा 19 साल तक ही अपना जीवन जी सकता है। यह आनुवांशिक बीमारी है जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है वैसे वैसे उसकी शक्ति कम होती जाती है। इस बीमारी में जब बच्चा नीचे बैठ जाता है तो वह अपने आप उठ नहीं सकता। धीरे-धीरे खेलने कूदने की शक्ति भी कम होती जाती है। जब बच्चे की उम्र 8 से 10 साल के बीच होती है तो वह निश्चित तौर पर व्हीलचेयर पर आ जाता है। शर्मा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी इस संबंध में दो बार मुलाकात हो चुकी है और कई बार चिट्ठी भी लिखी जा चुकी है लेकिन अब तक इन बच्चों को इलाज नसीब नहीं हो पाया है प्रदेश की सरकार पॉलिसी मैटर का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है औरजब केंद्रीय चिकित्सा मंत्री से इस संबंध में मुलाकात की गई तो उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा का मामला राज्य सरकार से जुड़ा हुआ है, आखिर हम इलाज के लिए जाए तो कहां जाएं। डॉक्टर के पास इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है जब तक देश में जीन थेरेपी से डीएमडी का इलाज संभव नहीं होता है तब तक इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है और यह काम केंद्र सरकार ही कर सकती है।

रामगोपाल शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ‘तरफ तो सरकार मूर्तियां लगा रही हैं और मुफ्त की रेवड़ियाँ बांट रही है दूसरी ओर डीएमडी से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बार फिर सरकार से उम्मीद लगाकर इन बच्चों के साथ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि हमारी आवाज सरकार तक पहुंचे और डीएमडी से पीड़ित बच्चों को इलाज नसीब हो सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विधानसभा चुनाव है और वोटों का अधिकार हमारे पास भी है, जो सरकार हमारे बच्चों की जान बचाएगी, हम उसी को वोट भी देंगे।

20 बच्चों को दी व्हील चेयर…

महावीर कैंसर हॉस्पिटल की ओर से ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) से पीड़ित 20 बच्चों को व्हील चेयर दी गयी। एक उम्र के बाद डीएमडी से पीड़ित बच्चे को व्हील चेयर की जरूरत पड़ती है। व्हील चेयर मिलने के बाद बच्चो के माता पिता ने खुशी जताई और हॉस्पिटल का आभार जताया। व्हील चेयर मिलने के बाद इन बच्चों को कही भी आने जाने में आसानी होगी।