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पुष्य अभिषेक के साथ मोती डूंगरी गणेशजी के जन्मोत्सव शुरू

पुष्य नक्षत्र के साथ ही प्रथम पूज्य मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर में गणेश चतुर्थी का उल्लास शुरू हो चुका है। गजानन महाराज का पुष्य अभिषेक व ध्वज पूजन के साथ जन्मोत्सव के कार्यक्रम शुरू हुए।

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जयपुर

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Murari

Sep 11, 2023

जयपुर। पुष्य नक्षत्र के साथ ही प्रथम पूज्य मोती डूंगरी गणेशजी मंदिर में गणेश चतुर्थी का उल्लास शुरू हो चुका है। गजानन महाराज का पुष्य अभिषेक व ध्वज पूजन के साथ जन्मोत्सव के कार्यक्रम शुरू हुए। इससे पहले महिलाएं कलश यात्रा लेकर मंदिर पहुंची। इस दौरान मंदिर परिसर में गणेशजी महाराज के जयकारे गूंज उठे।

महन्त कैलाश शर्मा के सान्निध्य में सुबह संकल्प लेकर भगवान गणेशजी महाराज का पंचामृत अभिषेक किया गया। गजानन महाराज का 251 किलो दूध, 25 किलो बूरा, 50 किलो दही, 11 किलो शहद, 11 किलो घी का के पंचामृत से अभिषेक हुआ, उसके बाद गुलाब जल एवं केवड़ा जल के बाद शुद्ध जल से अभिषेक किया गया। इससे पहले 501 महिलाएं कलश यात्रा के साथ मंदिर पहुंची। अभिषेक के बाद भक्तों को रक्षा सूत्र व हल्दी प्रसाद बांटा जा रहा है। इसके बाद ध्वज पूजन कर नवीन ध्वजा धारण करवाई गई। गणेशजी महाराज को 108 मोदक अर्पित किए जा रहे है। मोदक अर्पण 17 सितंबर तक चलेगा।

नहर के गणेशजी मंदिर में हुआ पुष्य अभिषेक

पुष्य नक्षत्र पर आज शहर के गणेशजी मंदिरों में गजानन का पुष्य अभिषेक किया गया। मोती डूंगरी गणेशजी के साथ नहर के गणेशजी और श्वेत सिद्धी विनायक गणेशजी मंदिर में गजानन का पुष्य अभिषेक किया गया।
ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित नहर के गणेशजी मंदिर में महंत जय शर्मा के सान्निध्य में सुबह गणपति अथर्वशीर्ष व मंत्रोच्चार के बीच गणेशजी महाराज का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद गजानन महाराज को नवीन पोशाक धारण करवाई गई। शाम को 251 दीपकों से महाआरती होगी।
सूरजपोल बाजार स्थित श्वेत सिद्धि विनायक गणेशजी मंदिर में महंत मोहनलाल शर्मा के सान्निध्य में गजानन महाराज के दुग्धाभिषेक किया गया। इसके बाद गणेशजी महाराज का विशेष शृंगार किया गया।
चांदपोल परकोटा वाले गणेश मंदिर सुबह गणेशजी महाराज का पुष्य अभिषेक किया गया। युवाचार्य पंडित अमित शर्मा के सानिध्य में 101 किलो दूध से गणेशजी का अभिषेक किया गया। गणेशजी महाराज को ध्वजा अर्पण कर शिखर पर ध्वजा लगाई गई। गजानन को नवीन पोशाक धारण करा फूल बंगले में विराजमान किया। इसके बाद गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ कर गणपति सहस्त्रनामावली से मोदक, दूर्वा व शमी पत्र अर्पण किए गए। भक्तों को रक्षा सूत्र बांध हल्दी की गांठ वितरित की गई।