जयपुर। राज्य सरकार की ओर से मरीजों और डॉक्टरों के फायदे को देखते हुए आईएचएमएस सिस्टम को लाया गया। इसका पूरा नाम इंटीग्रेटड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम है। इसे साल 2022 में लाया गया था। सबसे पहले एसएमएस अस्पताल में इस सिस्टम को लागू किया गया। इसका उद्देश्य यह था कि सभी मरीजों की बीमारियों की जांच रिपोर्ट व दवाईयों का इलाज आदि की कुंडली एक जगह होगी। कोई भी डॉक्टर किसी भी मरीज की ट्रिटमेंट हिस्ट्री निकालकर देख सकता है और उस आधार पर उसका इलाज किया जा सकता है। वहीं मरीज को पर्ची खो जाने का डर नहीं था। क्योंकि उसकी ट्रिटमेंट हिस्ट्री आईएचएमएस सिस्टम पर रखे जाने का प्रावधान था। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका।
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में इसे पहले ट्रायल के तौर पर लागू किया गया। तब से लेकर अब तक यह सिस्टम एक तरीके से ट्रायल के तौर पर ही चल रहा है। अब तक एसएमएस अस्पताल में पूरे तरीके से यह सिस्टम काम नहीं कर पा रहा है। जिसकी वजह से आज भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आईएचएमएस सिस्टम में अभी कई ऐसी खामियां है। जिनमें धीरे धीरे सुधार किया जा रहा है। हॉस्पिटल के अंदर ही से बिल जनरेट करने, लैब में सैंपल की जांच करने में कई समस्याएं आ रही है। लैबों में नए सिस्टम के शुरू करने से जांच का प्रोसेस थोड़ा बढ़ गया है। पहले की बजाय कर्मचारियों को इसमें समय ज्यादा लग रहा है। कई कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी ठीक से नहीं मिली, जिससे जांचों में ज्यादा समय लग रहा है। पुराने सिस्टम में क्यूआर स्कैन करने और सीआर नम्बर लगाते ही मरीज की डिटेल प्राप्त होती थी जिससे कई काम आसानी से होते थे।
इनका कहना है
एसएमएस अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल है। इस सिस्टम को स्टेज वाइ स्टेज काम में लिया जा रहा है। एक साथ इसे पूरी तरीके से लागू नहीं किया जा सकता है। अभी यह प्रक्रियाधीन है।
डॉ अचल शर्मा
अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल, जयपुर