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जयपुर आर्ट वीक : 7 दिन संगीत, कविता और पेंटिंग्स का अद्भुत संगम दिखा

जयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों के बीच कला और संस्कृति का जादू बिखेरने वाली एक यादगार शाम का आयोजन हुआ। पब्लिक आर्ट्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित जयपुर आर्ट वीक का समापन समारोह सूफी शाम के साथ हुआ।

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जयपुर। जयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों के बीच कला और संस्कृति का जादू बिखेरने वाली एक यादगार शाम का आयोजन हुआ। पब्लिक आर्ट्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित जयपुर आर्ट वीक का समापन समारोह सूफी शाम के साथ हुआ।

राजस्थान पत्रिका के सपोर्ट से आयोजित आर्ट वीक के अंतिम दिन आमेर स्थित पिंकसिटी स्टूडियो में मशहूर मिनिएचर आर्टिस्ट रियाज़उद्दीन की अद्वितीय मिनिएचर पेंटिंग्स ने सबका मन मोह लिया, तो वहीं उर्दू पोएट्री महफिल में सूफी कवि डॉ. वामिक सैफी ने अपनी नज्मों से सभी का दिल जीत लिया। 'आवतो बायरो बाजे: द थंडर्स रोर ऑफ एन एंपेंडिंग स्टोर्म' थीम पर आयोजित हुए कार्यक्रम को कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे लिवरपूल बाइनियल, ब्रिटिश काउंसिल, एमबसेड द फ्रांस के सहयोग से आयोजित किया गया।

सूफी संगीत से सजी शाम

आमेर किले और अकबरी मस्जिद की पृष्ठभूमि में सूफी संगीत की महफिल सजी। यहां कला, कविता और संगीत का ऐसा संगम हुआ, जिसने कला कद्रदानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रियाज़ उद्दीन की कला पारंपरिक मुगल शैली से प्रेरित रही, जिसने अपने आप में राजस्थान की विरासत की गहरी झलक पेश की। हर पेंटिंग में ऐतिहासिकता और परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिली। यह कला प्रदर्शनी न केवल एक दृश्यात्मक अनुभव थी, बल्कि यह जयपुर के सांस्कृतिक वैभव को संरक्षित करने की प्रेरणा भी दे रही थी।

कविताओं ने बांधा समां

सूफी कवि डॉ. वामिक सैफी की दिल को छू लेने वाली कविताओं ने दर्शकों के दिलों में गहरा प्रभाव छोड़ा। उनकी हर पंक्ति में सूफी दर्शन और प्रेम का संदेश छिपा था, जिसने इस आयोजन को खास बना दिया। सूफी कविताओं के बीच तबले और सितार के साथ संगीतकारों की जुगलबंदी ने चार चांद लगा दिए। यह कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक परंपराओं को याद दिलाने वाला एक अनोखा प्रयास था।