
Jaipur Earthquake : राजस्थान के भूकंप से सुरक्षित रहने की भूवैज्ञानिकों की धारणा गुरुवार रात को उस समय टूट गई, जब अरावली के पहाड़ पांच बार कांप उठे। तेज आवाज के साथ आए धरती के कंपन से लोग खौफजदा हो गए। इससे पहले 14 जुलाई को भी शाम 7 बजकर 54 मिनट पर पांच किलोमीटर की गहराई से भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 2.7 थी। इसका पता तक नहीं चला। राजस्थान जोन-2 में शामिल है और यह सबसे कम खतरे वाला जोन है लेकिन अरावली पहाड़ की दरारों में हलचल हो रही है और जयपुर के 70 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली दरारों में पैदा हो रही एनर्जी भूकंप आने की संभावना अभी बनी हुई है।
जमीन से 10 किलोमीटर नीचे केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलाॅजी के अनुसार जयपुर में झटके सुबह 4.09 बजे से 4.31 बजे के बीच महसूस किए गए। कुछ ही देर में पूरा शहर सडक़ पर आ गया। भूकंप का केंद्र जयपुर से साउथ वेस्ट करीब 4 किलोमीटर दूर जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था।गनीमत यह रही कि भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान नहीं हुआ। भूकंप के साथ विस्फोट जैसी आवाज भी सुनाई दी।
पहला झटका: 4.09 बजे, तीव्रता 4.4
दूसरा झटका: 4.11 बजे, तीव्रता 2.5
तीसरा झटका: 4.22 बजे, तीव्रता 3.1
चौथा झटका: 4.25 बजे, तीव्रता 3.4
पांचवां झटका: 4.31 बजे, तीव्रता 2.5
70 किलोमीटर में फैली हैं नियोटेक्टोनिक दरारें
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से वर्ष 2000 में पुस्तक सिस्मोटेक्रोटिक एटलस ऑफ इंडिया एंड इट्स इनवंजर्स में इस दरारों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक के मुताबिक जयपुर के पश्चिम में 50 किलोमीटर और पूर्व में 20 किलोमीटर क्षेत्र में हजारों साल पुरानी दरारें बनी हैं। इन दरारों में धरती के नीचे होने वाली हलचल के कारण सैकड़ों सालों से बदलाव आ रहा है। यह बदलाव इतना धीमा है कि आम इंसान को पता तभी चलता है जबकि धरती कापंती है।
...इसलिए आता है भूकंप
जयपुर में शुक्रवार को हुए भूकंप पर भी यही बात लागू होती है। यह नियोटेक्टोनिक फॉल्स जयपुर के पश्चिम में 50 किलोमीटर और पूर्व में तकरीबन 20 किलोमीटर तक फैली हैं। जयपुर जोन-2 और पश्चिमी राजस्थान जोन-3 में आता है। जोन-3 तीन भी भूंकप के झटके आते हैं। इसकी वजह अरावली पर्वतमाला के पूर्व में एक भ्रंश रेखा दरार है। इनमें हलचल होती है तो पश्चिमी राजस्थान के क्षेत्रों में भूकंप आता है।
तरंगों से पैदा हो रही आवाज
जयपुर में शुक्रवार को आए भूकंप से पहले ही आमजन को तेज आवाजें भी सुनाई दीं। राजस्थान विवि के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एचएच शर्मा का कहना है कि भूगर्भ में होने वाले बदलाव के कारण जब तरंगें धरती से टकराती हैं तो आवाज पैदा होती है। कई बार यह आवाज तेज हो सकती है। जयपुर में भूकंप के झटकों के दौरान आमजन को यही आवाज सुनाई दी।
एक्सपर्ट व्यू
जीएसआई ने अपनी बुक में इस बात का उल्लेख किया है कि जयपुर के आसपास के कई किलोमीटर क्षेत्र में नियोटेक्टोनिक दरारें बनी हुई हैं जिसमें बदलाव होता रहता है। भूकंप आने की वजह यही बदलाव है। आगे भी इस प्रकार के भूकंप आने की संभावना है। अगर यह प्रक्रिया ऐसे ही चलती रही तो हम जोन-2 से जोन-3 में भी चले जाएंगे हालांकि इसमें सालों का वक्त लग सकता है।
डॉ. आशा सक्सेना, असिस्टेंट प्रोफसर
भूगर्भ विभाग, राजस्थान विवि
Published on:
22 Jul 2023 08:26 am
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