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Video : जयपुर का बनेगा नया मास्टर प्लान, डवलपमेंट के साथ खोलेंगे ‘कमाई’ का रास्ता

नेशनल प्लानर बनाएंगे जयपुर का नया मास्टर प्लान

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भवनेश गुप्ता
जयपुर। जयपुर शहर का नया मास्टर प्लान (डवलपमेंट का ब्लू प्रिंट) अब लोकल की बजाय नेशनल और इंटरनेशनल टाउन प्लानर तैयार करेंगे। चेन्नई, बंगलुरू, पूणे की तर्ज पर यहां भी काम होगा। सरकार ने टाउन प्लानिंग शाखा को अत्याधुनिक तकनीक से मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद देश के ख्यात एक्सपर्ट टाउन प्लानर्स को भी शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जयपुर शहर का चौथा मास्टर प्लान 22 साल के लिए बनेगा। खास यह है कि इसमें इकोनोमिक ग्रोथ और डवलपमेंट की जुगलबंदी होगी। यानि, उस एरिया में आवास, कॉमर्शियल के साथ-साथ छोटे उद्योग, स्टार्टअप, वर्किंग स्पेस सहित कई तरह की गतिविधि तय की जाएगी। ज्यादा से ज्यादा निवेशकों के लिए धरातल तैयार पर फोकस होगा। इसके लिए देशभर के प्रमुख विषय विशेषज्ञों की भी राय ली जा रही है।

अभी यह है स्थिति

-अभी मास्टर प्लान का क्षेत्रफल 2940 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 725 गांव शामिल है।

-इसमें से करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर एरिया तो करीब-करीब खाली पड़ा है। शहर का विस्तार आसानी से यहां किया जा सकेगा।

-11 सेटेलाइट टाउन और 4 ग्रोथ सेंटर है, जो अब तक विकसित नहीं किए गए।

अब तक तीन मास्टर प्लान

1. पहला मास्टर प्लान- वर्ष 1971 से 1991 तक (बाद में इसे वर्ष 1998 तक बढ़ाया गया)। इसमें 391 वर्ग किलोमीटर एरिया और 132 गांव शामिल किए गए थे।

2. दूसरा मास्टर प्लान- वर्ष 1998 से 2011 तक प्रभावी रहा। इसमें 1959 वर्ग किलोमीटर एरिया और 478 गांव शामिल किए गए।

3. तीसरा मास्टर प्लान- वर्ष 2011 से 2025 तक के लिए। 2940 वर्गकिलोमीटर क्षेत्रफल है और इसमें 725 गांव शामिल हैं।

जनता को पहले यह चाहिए

1. रहने योग्य शहर हो, यानी यहां जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो। इसमें साफ पानी, कचरा मुक्त शहर, चौबीस घंटे पानी व बिजली सप्लाई, सुदृढ़ ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम, सार्वजनिक शौचालय।

2. सड़क क्षेत्र के साथ साथ फुटपाथ एरिया भी बढ़े, क्योंकि राहगीरों की किसी को चिंता नहीं है।सार्वजनिक परिवहन नीति में अंकित है कि सड़क क्षेत्र में चलने का पहला अधिकार राहगीर का है।

3. हर एरिया में सेन्ट्रल पार्क की तर्ज पर ऑक्सीजोन विकसित हो।

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टॉपिक एक्सपर्ट : एच.एस. संचेती, पूर्व मुख्य नगर नियोजक, राजस्थान

-शहर का दायरा 3 हजार वर्ग किलाेमीटर तक फैल चुका है। समुचित इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में छितराया हुआ डवलपमेंट सामने है। सेटेलाइट टाउन कंसेप्ट धरातल पर नहीं आ पाया। शहर के फिजिकल डवलपमेंट के साथ-साथ आर्थिक विकास भी जरूरी है। इसलिए मास्टर प्लान में आर्थिक विकास का समोवश होना ही चाहिए। आवासीय और कॉमर्शियल डवलपमेंट के साथ-साथ उसी एरिया में शिक्षा, पर्यटन, मेडिकल हब, छोटे उद्योग जैसी गतिविधियों के लिए भी जगह हो। कुल मिलकार संतुलित डवलपमेंट के साथ-साथ इकोनोमिक ग्रोथ किस तरह हो, इसके लिए देश की उच्च स्तरीय टीम को आउटसाेर्स करना चाहिए। इस पर मंथन भी चल रहा है।