
जितेन्द्र सिंह शेखावत
Ayodhya Ram Mandir : जयपुर की पुरानी राजधानी आमेर के किले में बनी सीता रसोई भी अद्भुत है। सीता रसोई में भगवान राम और अयोध्या से जुड़ी धार्मिक संस्कृति का मनमोहक चित्रण किया गया। रसोई में रामायण और महाभारत से जुड़ी राम और कृष्ण की लीलाओं का चित्रण वर्षों बाद भी फीका नही पड़ा है। चित्रों में खासकर अयोध्या का नजारा दिखता है।
इस सीता रसोई में धार्मिक चित्रों का समावेश कर ऐसा वातावरण बनाया गया ताकि भोजन करने वाले में अच्छे संस्कार पैदा हो सके। रसोई के चौक में कभी गुलाब, चंपा, चमेली आदि के फूलों की सुगंध महकती थी।राजा-रानी अपने परिवार के साथ शुद्ध और मनोरम वातावरण में बाजोट पर बैठ चांदी के बर्तनों में भोजन करते थे।
सीता रसोई की भोजन शाला के दरवाजे पर शुद्ध हवा के लिए बनी खिड़कियों से वहां का वातावरण सुरम्य बना रहता। राजसी वैभव से परिचय कराती इस रसोई की मोटी दीवारों में मिट्टी के सकोरों की गुप्त पाइप लाइन से कभी शुद्ध जल भी आता था। रसोई के बाहर गैलरी की मोटी दीवारों में सवा फीट लंबे मिट्टी के सकोरों की पाइप लाइन है। सकोरों की लाइन में आमेर किले के ऊपर बने टैंक का पानी आता था। मावठा सरोवर का पानी बैलों के चड़स से छह स्तर पर लिफ्ट कर किले की छत पर बने टांके में पहुंचाया जाता था। सवाई जयसिंह के समय मुगल शासकों ने आमेर पर कब्जा कर मोमीनाबाद बना दिया था।
तब मुगलों ने सीता रसोई के कुछ भित्ति चित्रों को हल्के रंग से दबा दिया था। मान चरित्रावली में इसका वर्णन किया गया है। जयगढ़ की भोजन शाला के कक्ष में लकड़ी के बाजोट पर थाल में परोसे भोजन को करते राजा और रानी को दर्शाया गया है। ऐसी ही भोजन की परंपरा इस रसोई में होती रही। देवेन्द्र भगत के मुताबिक आमेर के पुराने महलों से सीता-राम की मूर्तियों को सवाई जय सिंह सिटी पैलेस ले आए थे।
Published on:
17 Jan 2024 12:49 pm
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