
जयपुर. जैसे—जैसे आबादी बढ़ रही है... लोग प्राकृतिक चीजों का दोहन तेजी से कर रहे हैं। पेड़—पौधे...जल स्त्रोतों का दुरुपयोग किया जा रहा है। वायु प्रदूषित हो रही रही है..जल पर जलदाय विभाग भी मौन है। कुछ लोगों को खाकर थूकने में मजा आता है... सार्वजनिक जगहों पर मुंह फुचकारना शान समझते हैं। कहीं पीने के पानी की किल्लत इतनी है कि दिनभर नहीं आता..जबकि कई जगहों पर शहर में टंकी खुली छोड दी जाती हैं। ये बर्बादी तो है.. प्रदूषण भी हो रहा है। हालांकि, स्कूलों के छोटे—छोटे बच्चे शायद समझते हैं। वे प्रदूषण
Published on:
01 Oct 2017 06:57 pm
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