
निशानेबाज उर्मिला राठौर
देवेन्द्र सिंह / जयपुर. कई बार ऐसा होता है कि हम परिस्थितियों के आगे विवश हो जाते हैं और क्षमता होने के बावजूद कुछ नहीं कर पाते। कुछ ऐसा ही बूंदी जिले के अड़ीला गांव में जन्मी उर्मिला राठौर के साथ भी हुआ। उर्मिला का निशानेबाज बनने का सपना कॉलेज के समय से रहा है, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते अपने सपने को पूरा करने में अभी तक कामयाब नहीं हो सकी है। पिता ने भी बेटी का सपना पूरा करने के लिए अपनी हैसियत से बढ़कर सहयोग किया। यहां तक कि आजीविका का एकमात्र जरिया अपनी पुस्तैनी तीन बीघा जमीन में से डेढ़ बीघा जमीन भी बेच दी।
मिलने लगे मददगार
उर्मिला निशानेबाजी के अभ्यास के लिए जयपुर तो आ गई, लेकिन उसके पास यहां न तो ठहरने के लिए कोई ठिकाना था और न ही प्रैक्टिस के लिए पैसा। इसी बीच मालवीय नगर में रहने वाली मधु करवायूं ने उर्मिला राठौर की दास्तां सुनकर उसे अपने घर में रहने के लिए जगह दी। रहने को जगह तो मिल गई, लेकिन अभ्यास के लिए महंगी शूटिंग रेंज की फीस भरने के लिए पैसा नहीं था। कई दिनों के प्रयास के बाद वैशाली नगर स्थित एक निजी शूटिंग रेंज के संचालक अमरीश सिंह ने उर्मिला को 2500 रुपए महीने में अभ्यास करने की अनुमति दे दी। उर्मिला अभ्यास के लिए रोजाना 35 किमी का सफर साइकिल से तय करती है। वह मालवीय नगर से साइकिल पर वैशाली नगर और फिर वैशाली नगर से मालवीय नगर का सफर करती है।
इंटरनेशनल सलेक्शन ट्रायल में बेहतरिन प्रदर्शन
सितोलिया और गुलेल से शुरू हुई उर्मिला की कहानी अंतरराष्ट्रीय ट्रायल पर पहुंच जाएगी, किसी ने नहीं सोचा था। गांव से आकर कोटा के एक कॉलेज में दाखिला लिया और एनसीसी में रहते हुए 50 मीटर एनशूज राइफल से शूटिंग कॅरियर की शुरुआत की थी। तब 50 मीटर 3पी इवेंट में हिस्सा लेती थी। दो साल 50 मीटर 3पी इवेंट को छोड़कर 10 मीटर एयर राइफल को चुना। कॉलेज से निकलने के बाद 10 मीटर एयर राइफल में भाग लेने वाली उर्मिला ने केरल में आयोजित इंटरनेशनल सलेक्शन ट्रायल एक एवं दो में भाग लिया और 606 अंकों के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया। इससे पहले उर्मिला ने ऑल इंडिया मावलंकर शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेते हुए 21वीं रैंक हांसिल की। उर्मिला ने इससे पहले स्टेट में भी शानदार प्रदर्शन किया था और 400 में 381 अंक हासिल किए थे।
काश एक राइफल मिल जाए
गांव के कुछ लोगों के प्रयासों के बाद 6 महीने पहले खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना ने उर्मिला को एक राइफल उपलब्ध करवाई थी, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार सही नहीं होने से उर्मिला ने राइफल मंत्री को वापस लौटा दी। इसके बाद मंत्री चांदना ने 7 दिन के अंदर दूसरी राइफल दिलाने का वादा किया। उसके बाद उर्मिला ने राइफल के लिए साइकिल से न जाने कितनी बार राज्य मंत्री के बंगले के चक्कर काटे, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। उर्मिला को पूरा विश्वास है कि यदि उसे खुद की एक राइफल मिल जाए तो वो एक साल के भीतर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर ला सकती है।
Published on:
23 Jul 2020 03:06 pm
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