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सात माह बाद फिर से महापौर की कुर्सी संभालेंगी सौम्या

मंदिरों में जाकर लगाई धोक, पार्षद व अन्य भाजपाइयों पहुंचे उनके घर

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सात माह बाद फिर से महापौर की कुर्सी संभालेंगी सौम्या

सात माह बाद फिर से महापौर की कुर्सी संभालेंगी सौम्या

जयपुर. सौम्या गुर्जर निलंबन के मामले में राज्य सरकार को तब बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर स्टे दे दिया। सात महीने बाद ग्रेटर निगम महापौर की कुर्सी पर एक बार फिर सौम्या गुर्जर बैठेंगी। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि सौम्या महापौर की कुर्सी कब संभालेंगी। भाजपा इसे सरकार के खिलाफ पहली जीत मानकर चल रही है। फैसला आने के बाद सौम्या के घर पर पार्षदों से लेकर अन्य भाजपाइयों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सौम्या ने मंदिरों में जाकर धोक लगाई।

विवाद बढ़ेगा, टकराव की स्थिति बनी रहेगी

-सौम्या गुर्जर वापसी से आयुक्त-महापौर में विवाद होना तय है। क्योंकि आयुक्त की भूमिका की वजह से ही सौम्या का निलंबन हुआ था।

-पार्षद भी आयुक्त की कार्यशैली से नाराज हैं। अभी तक कार्यवाहक महापौर शील धाभाई इन पार्षदों पर ध्यान नहीं दे रही थीं। लेकिन सौम्या के आने के बाद ये पार्षद लामबंद होंगे और आयुक्त के खिलाफ नाराजगी बढ़ेगी।

-बीवीजी कंपनी के भविष्य का फैसला भी होगा। क्योंकि महापौर रहते हुए सौम्या गुर्जर ने ही बीवीजी को बाहर करने की बात कही थी। उस समय अधिकारियों ने कोर्ट का रास्ता दिखवाया था।

दो पक्षों में बंट चुके हैं पार्षद

-सात माह से कार्यवाहक महापौर का कामकाज शील धाभाई देख रही हैं। वे भाजपा की पार्षद हैं और सरकार ने उन्हें महापौर बनाया। उनके साथ कई पार्षद हैं। साथ ही सौम्या गुट के कई पार्षद उनके निलबंन के बाद महापौर के कमरे में नहीं गए।

6 जून 2021 को किया था निलंबित

राज्य सरकार ने 6 जून को सौम्या गुर्जर को मेयर पद से और अन्य तीन पार्षदों को आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ हुए विवाद के बाद निलंबित कर दिया था। इस निलंबन के बाद राज्य सरकार ने इस प्रकरण की न्यायिक जांच भी शुरू करवा दी थी। सरकार के निलंबन के फैसले को सौम्या गुर्जर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने प्रकरण में न्यायिक जांच होने तक दखल देने और निलंबन के आदेशों पर स्टे देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सौम्या गुर्जर के समर्थन में भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को चुनौती दी थी।