
सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश
जयपुर।सूर्यदेव इस साल 21 जून, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या तिथि पर रात्रि 11 बजकर 28 मिनट पर आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वर्षा कारक आद्रा नक्षत्र का अधिपति ग्रह राहु को माना गया हैं और राहु का मिथुन राशि में गोचर करना वर्षा कारक रहेगा। इस बार वर्षा के स्वामी सूर्य के होने, नव मेघों में संवर्त नाम का मेघ होने से पूर्वी प्रदेशों में उत्तम वर्षा के योग बन रहे है, जबकि पश्चिमी भागों में खंड वृष्टि होगी। इस वर्ष बारिश का योग 17 बिस्वा रहेगा। वर्षा ऋतु के चार महीने में पूरे 62 दिन बारिश के योग बन रहे हैं। ग्रहों के प्रभाव से आषाढ़ मास में कम और भाद्रपद में वर्षा अधिक होगी। धान्य में तीन गुना तक लाभ अर्थात विशेष मूल्य वृद्धि होगी।
ग्रहों की चाल से बन रहे अच्छी वर्षा के योग
ज्योतिषाचार्य पं सुरेश शास्त्री के अनुसार इस बार सूर्य का आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कुंभ लग्र में हो रहा है। जिसका स्वामी शनि स्वराशि का होकर मकर राशि में नीच के गुरु के साथ बैठा है। जिसके प्रभाव से समय पर वर्षा का योग प्रारंभ होगा। इसी दिन खंडग्रास सूर्यग्रहण होने से भी वर्षा के श्रेष्ठ योग बनेंगे। इस समय शुक्र बुध व शनि भी स्वराशि में है और शुक्र ग्रह का चतुर्थ स्थान पर बैठना धान्य प्राप्ति व सुभिक्ष का संकेत करता है। शुभ ग्रह जल राशि में बैठने से उत्तम वर्षा का योग रहेगा। देव गुरु बृहस्पति के अभी जल राशि में बैठे होने से अतिवृष्टि या संतोषजनक वर्षा का योग बन रहा है, लेकिन शनि के साथ बैठने से कही कही भारत के पश्चिम व मध्य भूभाग में अल्पवृष्टि के भी योग बन रहे है।
कही कम तो कही ज्यादा बारिश
संवत 2077 में रोहिणी का वास संधि पर होने से इस वर्ष देश में खंडवृष्टि अर्थात असमान वर्षा होगी। कुछ प्रदेशों में अत्यधिक वर्षा होने के कारण बाढ़ का प्रकोप हो, भूस्खलन, जन-धन, कृषि आदि की हानि हो तथा कुछ प्रदेशों में बहुत कम वर्षा होने के कारण कहीं सूखा, कहीं अनाज एवं कही पेयजल की कमी के कारण जन-धन की हानि, कृषि-अनाज आदि में कमी एवं गेहूं, सब्जियों, धान्यादि के मूल्यों में विशेष वृद्धि होगी।
Published on:
19 Jun 2020 10:45 pm
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