जयपुर

जयपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में इसलिए पिछड़ा

शहर का बेहतर विकास हो सके, सफाई व्यवस्था में सुधार हो। इसके लिए सरकार ने राजधानी में दो नगर निगम बनाए, लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan 2021) में जयपुर हेरिटेज नगर निगम की (Heritage Municipal Corporation) रैंक गिरकर 32वीं रही। शहरी सरकार के जनप्रतिनिधियों की मानें तो धरातल पर आज भी सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। जबकि हेरिटेज नगर निगम के 100 वार्डों में 4500 सफाई कर्मचारी लगे हुए है।

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Nov 21, 2021
जयपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में इसलिए पिछड़ा

जयपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में इसलिए पिछड़ा
— पार्षद ही बोले, नियमित नहीं पहुंच रहे हूपर
— रोजाना सड़कों पर नहीं लग पा रही झाडू

जयपुर। शहर का बेहतर विकास हो सके, सफाई व्यवस्था में सुधार हो। इसके लिए सरकार ने राजधानी में दो नगर निगम बनाए, लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan 2021) में जयपुर हेरिटेज नगर निगम की (Heritage Municipal Corporation) रैंक गिरकर 32वीं रही। शहरी सरकार के जनप्रतिनिधियों की मानें तो धरातल पर आज भी सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। जबकि हेरिटेज नगर निगम के 100 वार्डों में 4500 सफाई कर्मचारी लगे हुए है।

महापौर मुनेश गुर्जर खुद धरातल पर उतरी तो सफाई व्यव्स्था की सच्चाई भी सामने आ गई। महापौर पिछले कुछ दिनों से कई वार्डों का दौरा कर सफाई व्यवस्था देखी, जगह—जगह गंदगी के ढेर से महापौर को रूबरू होना पड़ा। महापौर के दौरों से भी शहर में सफाई व्यवस्था नहीं सुधर रही है। आज भी सड़कों पर जगह—जगह कचरा डिपो लगे हुए है। रोजाना घर—घर हूपर नहीं पहुंच रहे है। महापौर ने खुद सफाई कर्मचारियों के फिल्ड में नहीं आने की चोरी पकड़ी, कार्रवाई भी की, लेकिन हालात जस के तस है।

भाजपा पार्षद कुसुम यादव का कहना है कि शहर को साफ सफाई में अव्वल लाने के लिए सभी को साथ लेकर काम करना होगा। धरातल पर सफाई होगी तो ही शहर स्वच्छता में बाजी मार सकेगा। महापौर दौरे कर रही है, लेकिन उसका असर नजर नहीं आ रहा है।

पार्षद रजत विश्नोई का कहना है कि सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर को साफ करने में निगम प्रशासन फेल साबित हो रहे है। शहर में फिर से कचरे के ढेर लग गए है, गंदी गलियों की सफाई नहीं हो रही है। बीवीजी कंपनी सही काम नहीं कर रही है। पर्यटक यहां से बूरे अनुभव लेकर जा रहे है।

पार्षद अमर गुर्जर का कहना है कि शहर में दो निगम बनाने के बाद भी सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी है। हर वार्ड में 5 से 6 कचरा डिपो बने हुए है। सफाई व्यवस्था शुन्य के बराबर है। कचरा लेने के लिए हूपर दो से तीन दिन में आ रहे है।

खुले में शौच मुक्त के दावे झूठे...
राजधानी में खुले में शौच मुक्त के नगर निगम के दावों की पोल खुलकर सामने आ गई। स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर निगमों को खुले में शौच मुक्त के मामले 700 अंकों में 500 अंक ही मिले है।

जमीनी हकीकत...
— हेरिटेज नगर निगम क्षेत्र में 100 वार्डों में करीब 1500 से अधिक कचरा डिपो
— घर—घर से गीला—सूखा कचरा अलग—अलग संग्रहण नहीं हो रहा है
— सीएंडडी वेस्ट निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं, प्लांट को लेकर कवायद शुरू हुई, पर अभी तक काम नहीं
— शहर में हर सड़क पर अभी भी लग रहे कचरे के ढेर
— रोजाना कचरा लेने के लिए घर—घर नहीं पहुंच रहे हूपर
— खुले में शौच मुक्त का सपना अभी अधूरा, अधिकतर कम्यूनिटी टॉयलेट बंद पड़े, किसी में पानी की सुविधा नहीं

Published on:
21 Nov 2021 08:44 pm
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