
Sylvan Biodiversity Forest जयपुर में होगा मोर संरक्षण, तितली व चितल प्रजनन पर काम,Sylvan Biodiversity Forest जयपुर में होगा मोर संरक्षण, तितली व चितल प्रजनन पर काम,Sylvan Biodiversity Forest जयपुर में होगा मोर संरक्षण, तितली व चितल प्रजनन पर काम
Sylvan Biodiversity Forest जयपुर में होगा मोर सरंक्षण, तितली व चितल प्रजनन पर काम
— आगरा रोड पर विकसित हो रहा सिल्वन जैव विविधता वन
— योगा और ध्यान के लिए विशेष स्थान भी होगा विकसित
जयपुर। जेडीए की ओर से आगरा रोड पर करीब 113 हैक्टेयर भूमि पर सिल्वन जैव विविधता वन (Sylvan Biodiversity Forest) विकसित किया जा रहा है। इस वन में विभिन्न प्रकार के तितली प्रजनन (Butterfly Breeding Area) क्षेत्र, मोर सरंक्षण क्षेत्र (Peacock Conservation Area), चितल प्रजनन (Chittle Breeding Area) क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही इसमें अरावली में पायी जाने वाली लुप्त प्रायः वनस्पतियों का संरक्षण किया जाएगा। वहीं इस वन में योगा और ध्यान के लिए विशेष स्थान विकसित किया जाएगा।
जेडीए आयुक्त गौरव गोयल और उद्यानिकी अधिकारियों के सामने कंसलटेंट डॉ. राजीव खन्ना की अेार से पॉवर पोईन्ट प्रेजेंटेशन दिया गया। इस वन में आमजन के भ्रमण के लिए ईको ट्रेल व वन अधिकारियों के निरीक्षण एवं सामूहिक पर्यवेक्षण के लिए निरीक्षण पथ बनाये जायेंगे। जेडीए आयुक्त गौरव गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजट घोषणा वर्ष 2020-21 की पालना में जेडीए की ओर से आगरा रोड पर लगभग 113 हैक्टेयर भूमि पर सिल्वन जैव विविधता वन का विकास किया जा रहा है। जेडीए व वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से घाट की गुणी, आगरा रोड से लगभग 5 किमी दूर स्थित सुमेल रोड पर वन विभाग की भूमि पर सिल्वन जैव विविधता वन विकसित किया जा रहा है।
इस वन में ये काम भी होंगे
— जैव विविधता वन सिल्वन में पूर्व से लगे बेर के पौधों का संरक्षण किया जायेगा।
— 2 हैक्टेयर भूमि पर खुशबुदार पौधे व फूलदार पौधे रोपित किये जायेंगे।
— 2.5 हैक्टेयर भूमि में विभिन्न खण्डों में औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
— 5 हैक्टेयर भूमि 6 ऋतुओं के अनुरूप फूलदार पौधे भी लगाये जायेंगे।
— 4.3 हैक्टेयर भूमि पर पांच हजार पौधे निरीक्षण पथ पर लगाए जाएंगे।
— दस हैक्टेयर भूमि पर सघन पौधारोपण कर वाटिका क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
— आमजन के सुबह और शाम भ्रमण के लिए बनाये गये प्रवेश-निकास द्वार पूर्णतः ईकोफ्रेण्डली होंगे।
— करीब 50 हजार विभिन्न प्रकार की झांडियां लगायी जायेंगी एवं विभिन्न प्रकार के घास के बीज भी बोये जायेंगे।
Published on:
27 Oct 2021 09:31 pm
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