
अब यहां साल भर खरीदिए ऊनी कपड़े
अब यहां साल भर खरीदिए ऊनी कपड़े
— मानसरोवर में तिब्बति मार्केट शुरू, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने किया शुभारंभ
जयपुर। मानसरोवर में झूलेलाल मार्केट में बुधवार से तिब्बति मार्केट (Tibetan market) शुरू हो गया है। इसका शुभारंभ नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री शांति धारीवाल ने किया। इसके साथ ही बाजार में सर्दी के लिए ऊनी कपड़ों की बिक्री शुरू हो गई है। राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (Rajasthan Housing Board) ने यहां 266 दुकानें तिब्बति शरणार्थियों को आवंटित की है। मार्केट के शुभारंभ के मौके पर स्थानीय विधायक अशोक लाहोटी व यूडीएच सचिव कुंजीलाल मीना भी मौजूद रहे।
यूडीएच मंत्री धारीवाल ने कहा कि यह वही मार्केट है, जिसको गत सरकार ने बिना किसी प्लानिंग के 13 साल पहले बना दिया। 13 साल तक इसकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। 13 साल तक इन दुकानों को खरीदने के लिये कोई नहीं आया। जिनकों मण्डल ने यहां दुकानें आवंटित की, उन्होंने भी अपने आवंटन निरस्त करा लिए। अब इस मार्केट की कमियों को दूर कर दुकानों का निस्तारण कर मण्डल ने 22 करोड़ रूपये का राजस्व अर्जित किया है।
आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि मंडल ने मार्केट में 266 दुकानें तिब्बति शरणार्थियों को आवंटित की है। अब यहां सालभर लोगों को सर्दी के ऊनी कपड़े मिल सकेंगे। तिब्बति शरणार्थी एसोसिएशन की अध्यक्ष अध्यक्ष ल्हामो ने बताया कि बीते 40 सालों से तिब्बती शरणार्थी ऊनी और गर्म कपड़ों के व्यापार के लिए जयपुर आ रहे हैं, लेकिन व्यापार के लिए उन्हें कोई स्थान विशेष आवंटित नहीं होने से खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब दुकानों के आवंटन से समस्या से मुक्ति मिली। जयपुर के लोगों को अब वर्ष भर उनी कपड़े भी मिल सकेंगे।
आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि मानसरोवर में लघु व्यवसाइयों के लिए 450 दुकानें बनाई गई। 13 साल में इन दुकानों के निस्तारण के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन इनका निस्तारण नहीं हो सका। मंडल की पहल पर इन दुकानों में से 266 दुकानों को तिब्बती रिफ्यूजी होजरी रेडीमेड सेलर यूनियन को आवंटित किया गया, जो दुकानें शेष रह गई थीं, उन्हें स्थानीय लोगों को उपलब्ध करवाया गया। खास बात यह है कि इन दुकानों को मंडल की ओर से वर्ष 2014 की आरक्षित स्थिर दर पर पांच वर्ष की मासिक किस्त पर उपलब्ध कराई गई हैं। आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि यह मार्केट 13 वर्ष से बंद पड़ा था, इसलिए यहां की दुकानें खंडहर में तब्दील होती जा रही थी।
Published on:
17 Nov 2021 08:51 pm
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