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जेडीए का ये कैसा खेल : सरकार की आड़ में अवैध कोचिंग—रेस्टोरेंट संचालकों के बाद बिल्डर्स को बचाया, जानिए

— राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाने की आड़ में रोका अतिक्रमण हटाओ अभियान  

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जयपुर

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Pawan kumar

Sep 13, 2019

jda jaipur

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जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण ने राजधानी में संचालित अवैध कोचिंग संस्थानों और रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ जोरशोर से मुहिम छेड़ी थी। नोटिस पर नोटिस दिए गए, लेकिन जेडीए प्रशासन का जोश कुछ ही दिनों में ठंडा पड़ गया था। कुछ ऐसा ही हश्र अब शहर में अवैध निर्माण और बिना सेटबैक के बने मकानों के खिलाफ चली मुहिम का हुआ है।


जेडीए ने कुछ दिनों पहले ही शहर में अवैध निर्माण और बिना सेटबैक के बने मकानों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। इसके तहत पृथ्वीराज नगर दक्षिण समेत शहर के अन्य इलाकों में कार्रवाई की गई। जेडीए के बुलडोजर जैसे ही फ्लैट्स तक पहुंचे, शहर के बिल्डर्स सड़क पर उतर आए। जयपुर आवास निर्माण बिल्डर्स महासंघ से जुड़े बिल्डर्स की जेडीए प्रशासन के साथ बैठक हुई। इसमें बिल्डर्स ने जेडीए प्रशासन से कहा कि जो अवैध निर्माण और बिना सेटबैक छोड़े फ्लैट्स बने हैं उन्हें बिल्डर्स खुए तोड़ देंगे। भविष्य में जो भी निर्माण होगा वो नियमों के मुताबिक होगा। जेडीए प्रशासन ने बिल्डर्स की बात मान ली और कार्रवाई में ढिलाई देने पर सहमति जता दी।


सरकार को प्रस्ताव मतलब मामला ठंडा
बैठक में जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त ने जयपुर आवास निर्माण बिल्डर्स महासंघ के प्रतिनिधियों से कहा कि राज्य सरकार और जेडीए का मकसद अनावष्यक रूप से किसी को परेशान करना नहीं है। बल्कि नियमों की पालना सुनिश्चित करवाना है। जेडीए ने प्रतिनिधि मण्डल की भवन विनियमों को व्यावहारिक बनाने और सरलीकरण करने की मांग पर प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाने पर सहमति दी। जेडीसी ने जयपुर आवास निर्माण बिल्डर्स महासंघ के दो सदस्यों को मुख्य नगर नियोजक और नगर नियोजन विभाग के साथ बैठक कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए ताकि प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भिजवायस जा सके।


ऐसे ही अवैध कोचिंग—रेस्टोरेंट के साथ हुई थी सेटिंग

जेडीए प्रशासन ने अवैध निर्माण और बिना सेटबैक वाले फ्लैट्स के खिलाफ कार्रवाई में जिस तरह ढिलाई बरतने की हामी भरी है, ठीक वैसा ही शहर में संचालित अवैध कोचिंग संस्थान और रेस्टोरेंट के मामले में किया गया था। जेडीए ने पहले तो अवैध रूप से संचालित 182 कोचिंग—रेस्त्रां को नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा था। नोटिस अवधि बीतने के 10 दिन बाद जेडीए प्रशासन ने कोचिंग और रेस्टोरेंट संचालकों का पक्ष सुनने के लिए 21 और 22 अगस्त को बैठक की। बैठक में जेडीए प्रशासन ने अवैध कोचिंग और रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए नीतिगत निर्णय लेने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवाने का फैसला किया। इसी के साथ जेडीए की अवैध कोचिंग और रेस्टोरेंट के खिलाफ मुहिम ठंडी पड़ गई। दो दिन चली बैठक के बाद जेडीए ने अवैध कोचिंग और रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। यानी जेडीए के नोटिस धूल फांक रहे हैं।

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